देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ने वाला है। मौसम विभाग ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबा आने की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। बागेश्वर और पिथौरागढ़ में 29 अगस्त को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

Writer by Mohit Kumar 

29-8-2026 9:57pm

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। अगले 48 घंटों में इसके और स्पष्ट होकर आगे बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा मानसून ट्रफ अमृतसर से इस मौसम प्रणाली तक फैली हुई है, जबकि उत्तर पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश का दौर तेज होने की संभावना जताई गई है।

29 अगस्त को इन जिलों में अलर्ट

29 अगस्त को बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

30 अगस्त को कई जिलों में बारिश का जोर

30 अगस्त को देहरादून, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में भारी बारिश के साथ तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर की संभावना है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

31 अगस्त को चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट

31 अगस्त को मौसम और ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश का येलो अलर्ट है।

1 और 2 सितंबर को भी बारिश से राहत नहीं

मौसम विभाग ने 1 और 2 सितंबर को भी कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। इस दौरान देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में भारी बारिश हो सकती है।

भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा

भारी से बहुत भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क पर मलबा आने का खतरा बढ़ सकता है। कई स्थानों पर सड़कें और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं। निचले इलाकों में जलभराव के साथ-साथ नदी-नालों और गदेरों के अचानक उफान पर आने यानी फ्लैश फ्लड का खतरा भी बना रहेगा।

बारिश का असर कच्चे मकानों, निर्माणाधीन पुलों और अन्य कमजोर ढांचों पर पड़ सकता है। वहीं धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है। बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ कुछ स्थानों पर हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

चारधाम यात्रियों और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। चारधाम यात्रा केवल अत्यावश्यक होने पर करने और मौसम की स्थिति तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। तीव्र ढलानों वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखने की जरूरत है।

नदियों, नालों, गदेरों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोग बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। पहाड़ों में यात्रा करने वाले लोग सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही सफर करें।

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