नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हींग पाउडर की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य नियामक ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और लालजी गोधू एंड कंपनी के खिलाफ प्रतिबंध आदेश जारी करते हुए हींग पाउडर की बिक्री पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई लैब जांच में लिए गए नमूनों के निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने के बाद की गई है। Writer by Mohit Kumar 29-8-2026 11:53 pm एवरेस्ट की सभी किस्मों की बिक्री पर रोक FSSAI के अनुसार, एवरेस्ट के हींग पाउडर के नमूनों की जांच प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला में की गई थी। जांच में मिश्रित हींग पाउडर के नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए और गलत ब्रांडिंग की भी बात सामने आई। जांच में एक नमूने में अल्कोहल में घुलनशील अर्क की मात्रा शून्य प्रतिशत पाई गई, जबकि निर्धारित मानक के अनुसार इसकी मात्रा कम से कम 5 प्रतिशत होनी चाहिए। इसके अलावा एवरेस्ट के पीली हींग पाउडर और काली हींग पाउडर के नमूने भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें अल्कोहल में घुलनशील अर्क की मात्रा क्रमशः 3.29 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत पाई गई। कंपनी को सुधार की कार्ययोजना देने का निर्देश FSSAI ने एवरेस्ट को निर्देश दिया है कि वह उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करे। नियामक ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी कमियों को दूर करने में विफल रहती है तो आगे भी नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। लालजी गोधू की हींग भी जांच में फेल FSSAI ने लालजी गोधू एंड कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की है। नियामक के मुताबिक, कंपनी के हींग पाउडर के नमूने जांच के दौरान घटिया गुणवत्ता वाले और मिलावटी पाए गए। इसके बाद कंपनी को हींग पाउडर बेचने से रोक दिया गया। कंपनी को भी सुधारात्मक कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बाजार में केवल निर्धारित गुणवत्ता वाले उत्पादों का ही निर्माण और बिक्री हो। कच्ची हींग में अधिक स्टार्च भी बड़ी वजह जांच में यह भी सामने आया कि कंपाउंडेड हींग तैयार करने में इस्तेमाल की गई कच्ची हींग के कुछ नमूनों में स्टार्च की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक थी। खाद्य मानकों के अनुसार हींग में स्टार्च की मात्रा वजन के हिसाब से 1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिक स्टार्च पाए जाने के कारण इन नमूनों को घटिया गुणवत्ता का माना गया। उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है? FSSAI की इस कार्रवाई से एक बार फिर पैकेज्ड मसालों और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, किसी कंपनी के किसी खास उत्पाद के नमूने मानकों पर खरे न उतरने का मतलब यह नहीं है कि उसके सभी उत्पाद या पूरी कंपनी के उत्पाद असुरक्षित हैं। उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय लेबल, FSSAI लाइसेंस विवरण, पैकिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। फिलहाल FSSAI की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य निर्धारित खाद्य मानकों का पालन सुनिश्चित करना और कंपनियों को गुणवत्ता में सुधार के लिए बाध्य करना है। Post Views: 1 Post navigation उत्तराखंड में फिर सक्रिय हुआ मानसून, अगले पांच दिन भारी बारिश का अलर्ट; बागेश्वर-पिथौरागढ़ में ऑरेंज अलर्ट