सावन शिवरात्रि पर गूंजता है ‘हर हर महादेव’ Writer by Mohit Kumar 11- 8 -2026 12:6 am सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिवभक्त मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। खासतौर पर सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और पवित्र जल अर्पित करने की परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कांवड़ यात्रा से लौटने वाले श्रद्धालु भी भगवान शिव को कांवड़ में लाया गया जल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करता है और भक्त के जीवन में सुख, शांति एवं सकारात्मकता का संचार करता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का क्या है धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में जल को शुद्धता और जीवन का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा का संबंध शिवलिंग की पूजा से है। भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए अपनी मनोकामनाओं और भावनाओं को भगवान के चरणों में समर्पित करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों से जल लेकर आते हैं और सावन शिवरात्रि पर उस जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इस दौरान मंदिरों में ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। जलाभिषेक के लिए कौन-सी सामग्री होती है शुभ सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा में कई प्रकार की पूजन सामग्री का प्रयोग किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से— .शुद्ध जल या गंगाजल .बेलपत्र .धतूरा .भांग .पंचामृत .दूध .दही .शहद .घी .अक्षत .फूल .चंदन शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त बेलपत्र को श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ समय आपके दिए गए समय के अनुसार सावन शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:23 बजे से 06:00 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:58 बजे तक बताया गया है। हालांकि जलाभिषेक और शिवरात्रि पूजा का सटीक मुहूर्त स्थान और उस वर्ष की तिथि के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। कैसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ करें। सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धानुसार दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है। फिर दोबारा स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। अंत में भगवान शिव की आरती करके परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें। कांवड़ के जल का क्या महत्व है सावन के दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करते हैं। कांवड़िये पवित्र नदी से जल लेकर लंबी यात्रा करते हुए अपने निर्धारित शिव मंदिर तक पहुंचते हैं। वहां वे भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और संकल्प का भी प्रतीक मानी जाती है। कई श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में भी पैदल यात्रा पूरी करके भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। जल चढ़ाते समय रखें इन बातों का ध्यान शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मन को शांत और श्रद्धा से भरकर पूजा करना चाहिए। पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। मंदिर की स्थानीय परंपराओं और पुजारी द्वारा बताए गए नियमों का पालन करें। पूजा में किसी भी सामग्री का प्रयोग केवल दिखावे के लिए न करें। धार्मिक आस्था का मूल भाव श्रद्धा और भक्ति है। ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप से भक्तिमय होता है वातावरण सावन शिवरात्रि के दिन मंदिरों में भगवान शिव के जयकारों के साथ मंत्रोच्चार किया जाता है। ‘ॐ नमः शिवाय’ भगवान शिव का अत्यंत लोकप्रिय पंचाक्षरी मंत्र है। श्रद्धालु जलाभिषेक के दौरान इसका जाप करते हैं और भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना करते हैं। सावन शिवरात्रि पर क्यों उमड़ती है शिवालयों में भीड़ सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। यही कारण है कि पूरे महीने शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। सावन शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ जाती है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। कांवड़िये अपने साथ लाए पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा सनातन धार्मिक आस्था में विशेष स्थान रखती है। गंगाजल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री के साथ श्रद्धापूर्वक किया गया जलाभिषेक भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति और भक्ति का माध्यम बनता है। इस पावन अवसर पर मंदिरों में गूंजता ‘हर हर महादेव’ का जयघोष पूरे वातावरण को शिवमय बना देता है। श्रद्धालु भगवान शिव से अपने परिवार और समाज के सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं मंगल की प्रार्थना करते हैं। Post Views: 3 Post navigation ऑस्ट्रेलिया में 12 साल के भारतीय मूल के फुटबॉलर ने धार्मिक आस्था के लिए छोड़ा मैच, गले की स्वामीनारायण कंठी बनी वजह कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप, धरती हिलते ही मची तबाही; 100 से ज्यादा लोगों की मौत, सैकड़ों घायल