अमेरिका में ₹1,300 तक बिक रही नीम की दातुन, Writer by Mohit Kumar 11:10 am 18-8-2026 भारत में सदियों से दांतों की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली नीम की दातुन अब विदेशों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। अमेरिका के कुछ मॉल और स्टोर्स में नीम की दातुन लगभग 9.95 डॉलर से 15 डॉलर तक की कीमत में बेची जा रही है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 800 से 1,300 रुपये तक बैठती है। भारत में नीम की दातुन को आमतौर पर बेहद सामान्य और कम कीमत वाली पारंपरिक वस्तु माना जाता है। ग्रामीण और छोटे शहरों में लोग आज भी नीम की टहनी का इस्तेमाल दांतों की सफाई के लिए करते हैं। वहीं, अमेरिका जैसे विदेशी बाजारों में यही पारंपरिक वस्तु अलग पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ ऑर्गेनिक और नेचुरल प्रोडक्ट के रूप में पेश की जा रही है। पैकेजिंग और ब्रांडिंग से बढ़ जाती है कीमत विदेशी बाजार में किसी पारंपरिक भारतीय वस्तु की कीमत केवल उसके मूल उत्पाद पर निर्भर नहीं करती। उसकी पैकेजिंग, ब्रांड, प्रमाणन, आयात लागत, स्टोर का मार्जिन और मार्केटिंग भी कीमत को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि भारत में आसानी से उपलब्ध नीम की दातुन अमेरिका में प्रीमियम उत्पाद की श्रेणी में दिखाई दे सकती है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ रही मांग अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में प्राकृतिक तथा कम-केमिकल वाले उत्पादों को लेकर रुचि बढ़ी है। इसी वजह से नीम, तुलसी, हल्दी, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और अन्य भारतीय पारंपरिक उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह मिल रही है। नीम को भारत में लंबे समय से पारंपरिक रूप से दांतों और मुंह की सफाई से जोड़ा जाता रहा है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य संबंधी दावे को वैज्ञानिक प्रमाण और उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। भारत की परंपरा, विदेशों में प्रीमियम प्रोडक्ट नीम की दातुन की कहानी यह दिखाती है कि भारत की कई पारंपरिक चीजें विदेशों में नए रूप और बेहतर पैकेजिंग के साथ प्रीमियम उत्पाद बन सकती हैं। जिस दातुन को भारत में रोजमर्रा की सामान्य वस्तु समझा जाता है, वही अमेरिका में आकर्षक पैकेजिंग और ऑर्गेनिक मार्केटिंग के कारण कई गुना कीमत पर बिक सकती है। हालांकि, 9.95 से 15 डॉलर की कीमत हर अमेरिकी स्टोर में समान नहीं है। वास्तविक कीमत ब्रांड, पैक में दातुन की संख्या, गुणवत्ता, बिक्री स्थल और आयात लागत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुल मिलाकर, नीम की दातुन की यह कीमत भारतीय पारंपरिक ज्ञान और उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लोकप्रियता की दिलचस्प मिसाल है। यह भी बताती है कि सही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय और पारंपरिक उत्पाद वैश्विक बाजार में बड़ी कीमत हासिल कर सकते हैं। Post Views: 2 Post navigation तुकाराम मुंढे: 21 साल में 25 ट्रांसफर, फिर भी नहीं बदला तेवर; FDA कमिश्नर बनते ही मिलावटखोरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई से फिर चर्चा में ‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर बाबा रामदेव का पलटवार, बोले- बौद्धिक अराजकता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं