रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए पैदल मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। हाल ही में चीरबासा क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना सामने आई, जिसके बाद कुछ समय के लिए यात्रियों की आवाजाही रोकनी पड़ी। करीब तीन घंटे की कार्रवाई के बाद मार्ग को साफ कर यात्रा दोबारा सुचारू कर दी गई।

Writer by Mohit Kumar 

11-9-2026 3:26 pm

चीरबासा में पत्थर गिरने से मची अफरा-तफरी

केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा क्षेत्र को संवेदनशील माना जाता है। हाल की घटना में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से एक महिला तीर्थयात्री की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा को देखते हुए श्रद्धालुओं को रास्ते में रोक दिया गया था। प्रशासन और संबंधित टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और मार्ग से मलबा व पत्थर हटाने के बाद लगभग तीन घंटे में यात्रा फिर शुरू कर दी।

पहले भी बारिश के दौरान बाधित हुआ था मार्ग

मानसून के दौरान चीरबासा समेत केदारनाथ पैदल मार्ग के कई हिस्सों में पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। जुलाई में भी चीरबासा के पास लगातार मलबा और बोल्डर गिरने के कारण घोड़े-खच्चरों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई थी।

अभी कैसी है यात्रा की स्थिति?

भारत मौसम विज्ञान विभाग के उपलब्ध चारधाम सेक्टर अपडेट में रुद्रप्रयाग से केदारनाथ क्षेत्र में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना दर्ज की गई थी। ऐसे मौसम में पहाड़ी रास्तों पर अचानक पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि केदारनाथ जाने से पहले मौसम और प्रशासन की ताजा एडवाइजरी जरूर जांचें। बारिश तेज होने पर संवेदनशील स्थानों पर रुकना या आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है।

15 सितंबर से हेली सेवा का भी विकल्प

केदारनाथ यात्रा के दूसरे चरण को देखते हुए 15 सितंबर से हेली सेवा शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके लिए टिकट बुकिंग 7 सितंबर से शुरू होने की सूचना दी गई थी।

यात्रियों के लिए जरूरी संदेश: केदारनाथ का 16 किलोमीटर का पैदल मार्ग प्राकृतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। बारिश के मौसम में रास्ता साफ दिखाई देने के बावजूद ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा हो सकता है। इसलिए श्रद्धालु प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और मौसम खराब होने पर यात्रा को लेकर जल्दबाजी न करें।

नोट: आपके दिए 150 मीटर वाले पुराने घटनाक्रम के बजाय, ताजा उपलब्ध रिपोर्टों में चीरबासा में हाल की पत्थर गिरने की घटना और उसके बाद लगभग तीन घंटे में यात्रा बहाल होने की जानकारी मिल रही है। इसलिए ब्लॉग में वर्तमान स्थिति को इसी अपडेट के आधार पर लिखना ज्यादा उचित रहेगा।

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