महाराष्ट्र में कॉटन कैंडी यानी ‘बुढ़िया के बाल’ को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्ती का असर अब बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर और IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्रवाई के बाद चमकीले गुलाबी और नीले रंग वाली कॉटन कैंडी की बिक्री पर रोक लगी है। हालांकि, कॉटन कैंडी पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्रतिबंधित और हानिकारक सिंथेटिक फूड कलर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। क्यों गायब हुआ गुलाबी रंग ? Writer by Mohit Kumar 29-8-2026 3:26 pm कॉटन कैंडी को आकर्षक गुलाबी या लाल रंग देने के लिए कुछ विक्रेताओं द्वारा Rhodamine-B जैसे औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। यह खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल के लिए अनुमत रंग नहीं है। ऐसे रसायनों का भोजन में इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। FDA की सख्ती के बाद कई विक्रेताओं ने रंगीन कॉटन कैंडी की जगह अब सिर्फ चीनी से बनी सफेद कॉटन कैंडी बेचनी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर ‘मुंढे इफेक्ट’ की चर्चा बाजार में इस बदलाव को सोशल मीडिया पर लोग ‘मुंढे इफेक्ट’ के नाम से चर्चा में ला रहे हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद बचपन में मेले और बाजारों में मिलने वाली सफेद कॉटन कैंडी अपने पुराने रूप में वापस दिखाई दे रही है। दरअसल, बिना रंग वाली कॉटन कैंडी का प्राकृतिक रंग सफेद होता है। रंग मिलाने के बाद ही इसे गुलाबी, नीला या दूसरे चमकीले रंगों में बदला जाता है। सिर्फ कॉटन कैंडी ही नहीं, दूसरे स्ट्रीट फूड भी निशाने पर खाद्य सुरक्षा अभियान का असर दूसरे स्ट्रीट फूड पर भी दिखाई दे रहा है। मंचूरियन, चिकन लॉलीपॉप, शेजवान चटनी और अन्य खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले अनुमति से बाहर या हानिकारक रंगों की भी जांच की जा रही है। FDA की कार्रवाई का उद्देश्य दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को यह संदेश देना है कि खाने को आकर्षक बनाने के लिए किसी भी औद्योगिक या प्रतिबंधित केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उल्लंघन करने पर हो सकती है कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। अब ‘बुढ़िया के बाल’ खरीदते समय रखें ध्यान कॉटन कैंडी खरीदते समय उसका रंग बेहद चमकीला या असामान्य दिखाई दे तो सावधानी बरतना बेहतर है। सफेद कॉटन कैंडी अपने आप में असुरक्षित नहीं है—मुख्य चिंता उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले अनधिकृत रंगों और अन्य मिलावटों को लेकर है। Post Views: 5 Post navigation 1 सितंबर से मुंबई में महंगा होगा दूध, थोक कीमत में ₹9 प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हिमालयी झीलों का बढ़ता खतरा: 7,500 ग्लेशियल झीलों पर मंडरा रहा आपदा का साया