करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, तेज और सुगम यातायात उपलब्ध कराना होता है। लेकिन विडंबना यह है कि कई जगहों पर सड़कें बनने के कुछ ही महीनों या पहली ही बारिश के बाद टूटने लगती हैं। ऐसे मामलों में आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो सड़कें इतनी जल्दी खराब क्यों हो जाती हैं। Writer by Mohit Kumar 11 july 2026 11: 55 pm विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी है। यदि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की गिट्टी, डामर या सीमेंट का उपयोग नहीं किया जाता, तो सड़क की मजबूती कम हो जाती है और वह भारी वाहनों तथा बारिश का दबाव नहीं झेल पाती। इसके अलावा भ्रष्टाचार भी एक गंभीर समस्या है। कई बार निर्माण कार्य में लागत बचाने या अनुचित लाभ कमाने के लिए मानकों से समझौता किया जाता है। निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया कमजोर होने के कारण ऐसी खामियां समय रहते सामने नहीं आ पातीं। परिणामस्वरूप सड़कें तय समय से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और उनकी मरम्मत पर फिर से सरकारी धन खर्च करना पड़ता है। मानसून के दौरान खराब ड्रेनेज सिस्टम भी सड़कों के टूटने का प्रमुख कारण माना जाता है। जब वर्षा का पानी सड़क पर लंबे समय तक जमा रहता है, तो वह सड़क की सतह और उसकी नींव को कमजोर कर देता है। इससे दरारें पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे बड़े गड्ढे बन जाते हैं। यदि सड़क निर्माण के साथ प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हाल के समय में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में पहली ही बारिश के बाद सड़कों पर दरारें और गड्ढे दिखाई दिए। इन घटनाओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई सड़कें बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण के हर चरण की पारदर्शी निगरानी, गुणवत्ता की नियमित जांच और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है। साथ ही आधुनिक तकनीक, बेहतर निर्माण सामग्री और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, तो करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि की बचत होगी और लोगों को लंबे समय तक सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़कें मिल सकेंगी। इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी, यातायात सुगम होगा और देश के बुनियादी ढांचे पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। Post Views: 1 Post navigation Previous Post