सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं आएगा नजर

Writer by Mohit Kumar 

10:50 12-8-2026 pm

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लग रहा है। यह वर्ष का एकमात्र पूर्ण सूर्य ग्रहण है और खगोलीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए पूरी तरह ढक देता है।

हालांकि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस ग्रहण को सीधे देख पाना संभव नहीं होगा। भारत में जिस समय ग्रहण की मुख्य अवस्थाएं होंगी, उस समय यहां रात होगी। भारतीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार भी 12 अगस्त का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

12 अगस्त की रात से 13 अगस्त तक रहेगा ग्रहण

भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का समय 12 अगस्त की रात से शुरू होकर 13 अगस्त की देर रात तक चलेगा। आपके दिए गए समय के अनुसार इसकी प्रमुख अवस्थाएं इस प्रकार हैं:

.ग्रहण की शुरुआत: 12 अगस्त, रात 9:04 बजे

.पूर्ण ग्रहण की शुरुआत: रात 10:28 बजे

.परमग्रास यानी ग्रहण का चरम: रात 11:16 बजे

.ग्रहण की समाप्ति: 13 अगस्त, रात 1:28 बजे

भारत में क्यों नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण को देखने के लिए किसी स्थान पर उस समय दिन का होना और वह स्थान ग्रहण की दृश्यता वाले क्षेत्र में होना जरूरी है। 12 अगस्त 2026 के ग्रहण का मुख्य मार्ग उत्तरी गोलार्ध के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रहा है।

पूर्ण ग्रहण का मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों सहित आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत इस दृश्यता क्षेत्र से बाहर है।

इसलिए भारत में लोग इसे आसमान में प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे। खगोलीय संस्थाओं और मीडिया प्लेटफॉर्मों की ओर से ऑनलाइन प्रसारण के जरिए इस घटना को देखा जा सकता है। NASA ने भी ग्रहण के लाइव प्रसारण की जानकारी दी है।

भारत में सूतक काल को लेकर क्या स्थिति है

भारतीय धार्मिक परंपराओं में सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल मानने की परंपरा है। आमतौर पर इसे ग्रहण शुरू होने से पहले की अवधि माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन आदि को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

लेकिन इस सूर्य ग्रहण के संबंध में महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार सामान्यतः इस ग्रहण का सूतक भारत में मान्य नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं बताई जा रही है।

हालांकि सूतक से जुड़े नियम धार्मिक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

किन देशों में दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण

12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण कई क्षेत्रों में बेहद शानदार दृश्य प्रस्तुत करेगा। पूर्ण ग्रहण का प्रमुख मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, आर्कटिक क्षेत्र, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों से होकर गुजरता है।

जहां पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा, वहां कुछ समय के लिए सूर्य पूरी तरह चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा और दिन के समय आसमान में अंधेरा जैसा वातावरण बन सकता है। पूर्णता के दौरान सूर्य का बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना भी दिखाई दे सकता है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण कैसे बनता है

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर पड़ती है और जिस क्षेत्र से यह छाया गुजरती है, वहां सूर्य का कुछ या पूरा हिस्सा ढका हुआ दिखाई देता है।

जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पूर्ण ग्रहण का क्षेत्र काफी संकरा होता है, जबकि इसके आसपास के बड़े क्षेत्र में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई दे सकता है।

ग्रहण देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी

भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन जिन क्षेत्रों में लोग इसे प्रत्यक्ष देखेंगे, उनके लिए आंखों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रहण के सामान्य या आंशिक चरण में बिना उचित सोलर फिल्टर के सूर्य को सीधे देखना आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

विशेष सोलर सेफ्टी ग्लास या प्रमाणित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी है। केवल पूर्ण ग्रहण के बहुत छोटे पूर्णता चरण में ही परिस्थितियां अलग होती हैं; बाकी चरणों में आंखों की सुरक्षा जरूरी रहती है।

2026 में इससे पहले भी लगा था सूर्य ग्रहण

साल 2026 में इससे पहले 17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) हुआ था। इसके बाद 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण हो रहा है। इस तरह अगस्त का ग्रहण 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण और वर्ष का पूर्ण सूर्य ग्रहण है।

भारत के लिए क्या है खास

भारत में इस खगोलीय घटना की प्रत्यक्ष दृश्यता नहीं होने के बावजूद सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ग्रहण वैज्ञानिकों को सूर्य के बाहरी वातावरण और उसकी कोरोना का अध्ययन करने का अवसर देता है।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लाखों लोग इस दुर्लभ घटना को देखने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब एक अरब लोग आंशिक ग्रहण देख सकते हैं, जबकि लगभग 1.5 करोड़ लोग पूर्णता के मार्ग के करीब हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *