पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद काली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर निर्धारित है, जबकि शुक्रवार को नदी 888.90 मीटर पर बह रही थी। जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा और झूलाघाट समेत कई इलाकों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

Writer by Mohit Kumar 

5-9-2026 2 :46 pm

चमेलिया नदी ने बढ़ाई चिंता

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई तबाही के बाद सीमावर्ती इलाकों में चमेलिया नदी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि यदि नेपाल की तरह अचानक बाढ़ और नदी के उफान की स्थिति बनी, तो भारत-नेपाल सीमा से लगे बड़े क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

पिथौरागढ़ के गेठीगड़ा, सिमपानी, तालेश्वर, झूलाघाट, कानड़ी, सप्तड़ी, सीमू, बलतड़ी, तड़ीगांव और हल्दू समेत कई गांवों के अलावा चंपावत के सीमा क्षेत्र से लगे इलाकों, टनकपुर तथा नेपाल के वीनायक, सेरा, जेबली, जुलाघाट, ननतड़ी, खड्यानी और सतपाली जैसे क्षेत्रों में रहने वाली 50 हजार से अधिक आबादी को खतरे की आशंका बताई जा रही है। सूचना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गई है।

बनबसा बैराज पर चौथे दिन भी रेड अलर्ट

बनबसा बैराज पर शारदा नदी का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,31,334 क्यूसेक दर्ज किया गया। इससे पहले सुबह छह बजे यह 1,02,342 क्यूसेक, आठ बजे 1,14,906 क्यूसेक, 10 बजे 1,18,710 क्यूसेक, 12 बजे 1,25,446 क्यूसेक और दोपहर एक बजे 1,29,582 क्यूसेक था।

जलस्तर को देखते हुए बैराज पर लगातार चौथे दिन भी सुरक्षा के मद्देनजर चार पहिया वाहनों के संचालन पर रोक जारी रही। बैराज प्रशासन के अनुसार नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आने के बाद ही चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू किया जाएगा।

क्षेत्र में पहली जून से अब तक करीब 1180 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

पहाड़ी दरकने से घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क बंद

शुक्रवार देर शाम हुई बारिश के बाद घाट-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी दरकने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क पर मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर आने के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

दिल्ली से सुबह पिथौरागढ़ पहुंचने वाली बस भी रास्ते में फंस गई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर जेसीबी मशीन मौके पर भेजी गई, लेकिन पहाड़ लगातार दरकने और मलबा गिरने के कारण सड़क साफ करना चुनौतीपूर्ण बना रहा। देर रात तक भी मार्ग नहीं खुल पाया।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि सड़क को जल्द से जल्द खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने तथा मौसम खराब होने पर विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *