अगस्त में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड, बारिश 16% कम; प्रशांत महासागर में उठ रहा ‘मौसमी दैत्य’, किसानों पर मंडरा रहा El Niño का खतरा

Writer by Mohit Kumar 

5-9-2026 3:33 pm

नई दिल्ली। भारत में मौसम का मिजाज इस समय चिंता बढ़ाने वाला है। अगस्त 2026 में देश ने जहां गर्मी का नया रिकॉर्ड देखा, वहीं बारिश भी सामान्य से कम रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में देशभर में सामान्य से करीब 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही यह महीना 1901 के बाद भारत का सबसे गर्म अगस्त रहा।

अब मौसम विशेषज्ञों की नजर प्रशांत महासागर में बन रही El Niño की स्थिति पर है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO ने चेतावनी दी है कि मौजूदा El Niño आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है और इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।

प्रशांत महासागर में क्या हो रहा है?

El Niño प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। यह बदलाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हवा, बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

अगर El Niño ज्यादा मजबूत होता है तो कई क्षेत्रों में सामान्य मौसम चक्र बिगड़ सकता है। कुछ जगहों पर सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता ?

भारत में El Niño को लेकर सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर होती है। इतिहास में कई मजबूत El Niño घटनाओं के दौरान भारत में मानसून कमजोर रहने के उदाहरण सामने आए हैं। हालांकि हर El Niño का प्रभाव एक जैसा नहीं होता और भारतीय मानसून पर कई दूसरे समुद्री और वायुमंडलीय कारक भी असर डालते हैं।

ऐसे में अगर आने वाले महीनों में El Niño मजबूत होता है तो किसानों के लिए बारिश और तापमान का पूर्वानुमान बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगा।

अगस्त में ही दिखने लगे मौसम के संकेत

अगस्त 2026 में देशभर में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की बात सामने आई है। इसी दौरान तापमान भी असामान्य रूप से अधिक रहा और अगस्त ने 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त का रिकॉर्ड बनाया।

बारिश की कमी और ज्यादा तापमान का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है। खासतौर पर जिन फसलों को पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है, उनके लिए मिट्टी में नमी बनाए रखना चुनौती बन सकता है।

किसानों पर क्या पड़ सकता है असर ?

अगर बारिश का पैटर्न लंबे समय तक कमजोर रहता है तो खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ सकता है। धान, दालें, तिलहन और दूसरी वर्षा आधारित फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।

दूसरी ओर, यदि कम बारिश के बाद अचानक अत्यधिक बारिश होती है तो खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

यानी किसानों के सामने चुनौती सिर्फ बारिश कम होने की नहीं है, बल्कि मौसम के ज्यादा अनिश्चित और चरम होने की भी है।

तापमान बढ़ने से बढ़ेगी मुश्किल

El Niño के मजबूत होने के साथ वैश्विक तापमान पर भी नजर रखी जा रही है। ज्यादा तापमान से मिट्टी की नमी तेजी से कम हो सकती है और फसलों को अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है।

इसका असर कृषि लागत पर भी पड़ सकता है। सिंचाई के लिए ज्यादा पानी, बिजली या डीजल की जरूरत होने से किसानों का खर्च बढ़ सकता है।

WMO ने क्यों जताई चिंता ?

WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने El Niño के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि दुनिया के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में El Niño के मजबूत होने पर मौसम संबंधी जोखिम और बढ़ सकते हैं।

इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य उत्पादन, पानी की उपलब्धता, ऊर्जा की मांग और अर्थव्यवस्था के कई दूसरे क्षेत्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

क्या भारत में सूखा तय है ?

ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। El Niño का मजबूत होना अपने आप में भारत में सूखे की गारंटी नहीं है। भारतीय मानसून पर हिंद महासागर की परिस्थितियां, समुद्री तापमान, वायुमंडलीय गतिविधियां और अन्य मौसमी प्रणालियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इसलिए आने वाले महीनों में मौसम विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों के नए पूर्वानुमानों पर नजर रखना जरूरी होगा।

किसानों के लिए आगे क्या जरूरी ?

मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर खेती की रणनीति बनाना महत्वपूर्ण होगा। पानी की उपलब्धता को देखते हुए सिंचाई की योजना, मिट्टी में नमी संरक्षण और जरूरत पड़ने पर कम अवधि वाली फसलों का विकल्प उपयोगी हो सकता है।

El Niño का बढ़ा खतरा: अगस्त रहा सबसे गर्म, बारिश

अगस्त की रिकॉर्ड गर्मी और 16 प्रतिशत कम बारिश के बाद अब El Niño ने मौसम की चिंता बढ़ा दी है। यदि प्रशांत महासागर में यह स्थिति और मजबूत होती है और इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है, तो भारत में मानसून, तापमान और खेती पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि अभी किसी बड़े कृषि संकट की निश्चित भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी, लेकिन 2026-27 का मौसम किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *