गोंडा में पतंजलि के ₹50 करोड़ के मानहानि मुकदमे को लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव और पतंजलि पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। 18 सितंबर 2026 को मीडिया से बातचीत में उन्होंने पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वह इस मामले में पीछे हटने वाले नहीं हैं। Writer by Mohit Kumar 18-9-2026 5:7 pm कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, विवाद पतंजलि के घी को लेकर बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पहले दिए गए बयानों से जुड़ा है। पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने उनके खिलाफ ₹50 करोड़ की मानहानि का दावा किया है। कंपनी का आरोप है कि उनके बयानों से उसकी प्रतिष्ठा और कारोबार को नुकसान पहुंचा। मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही है और 18 सितंबर को सुनवाई निर्धारित थी। बृजभूषण सिंह ने अब इस कानूनी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि अदालत उन्हें सजा देती है और जेल भेजती है तो वह जमानत नहीं कराएंगे। उनका कहना है कि जेल जाने को वह खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ जागरूकता से जोड़कर देखते हैं। “मिलावटखोरों के सम्राट” कहकर साधा निशाना अपने बयान में बृजभूषण सिंह ने बाबा रामदेव और पतंजलि को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशों से कथित रूप से कचरा लाकर उसे रिफाइन करके भारत में घी के नाम पर बेचा जा रहा है। उन्होंने विशेष तौर पर कनाडा और सिंगापुर का जिक्र किया। ये आरोप बृजभूषण सिंह के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पतंजलि के कई उत्पादों पर विदेशों में कार्रवाई हुई है। हालांकि, ऐसे दावों को संबंधित देशों के नियामकीय रिकॉर्ड और अदालतों के दस्तावेजों से अलग-अलग सत्यापित किया जाना जरूरी है। गायों और घी की मात्रा पर भी उठाया सवाल बृजभूषण सिंह ने अपने पास मौजूद गायों का उदाहरण देते हुए घी के उत्पादन पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि उनके यहां करीब 150 गायें हैं और उनसे महीने में लगभग 100 किलो शुद्ध घी निकलता है। इसी आधार पर उन्होंने बाजार में कम कीमत पर बिकने वाले घी की लागत और शुद्धता पर सवाल खड़े किए। हालांकि, किसी उत्पाद की कीमत या बाजार में उपलब्ध मात्रा मात्र से यह साबित नहीं होता कि वह नकली है। घी की वास्तविक शुद्धता निर्धारित करने के लिए अधिकृत खाद्य प्रयोगशाला की जांच और नियामकीय रिपोर्ट जरूरी होती है। पतंजलि की ओर से क्या कहा गया? मानहानि मामले में पतंजलि की ओर से कहा गया है कि बृजभूषण सिंह के आरोप बेबुनियाद हैं और उनके बयानों से कंपनी की ब्रांड इमेज प्रभावित हुई। कंपनी ने कानूनी कार्रवाई के जरिए अपने पक्ष को अदालत के सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विवाद की पृष्ठभूमि में खाद्य गुणवत्ता से जुड़े पुराने मामले भी चर्चा में आए हैं। नवभारत टाइम्स ने बताया कि पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद घी के नमूने से जुड़ा मामला अदालत तक पहुंचा और पतंजलि पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया था। अब नजर अदालत की सुनवाई पर बृजभूषण सिंह के ताजा बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। एक तरफ कंपनी ने मानहानि का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ बृजभूषण सिंह अपने आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कायम दिखाई दे रहे हैं। अब इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका अदालत और आधिकारिक खाद्य जांच रिपोर्टों की होगी। किसके आरोप सही हैं और घी की गुणवत्ता को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है, इसका अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणों के आधार पर ही होगा। यह विवाद सिर्फ दो चर्चित व्यक्तियों के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, उपभोक्ता का भरोसा और कंपनियों द्वारा सार्वजनिक आरोपों पर कानूनी कार्रवाई जैसे बड़े सवाल भी सामने आते हैं। मुख्य बात: बृजभूषण सिंह के कनाडा-सिंगापुर से “कचरा” लाने और पतंजलि घी में मिलाने संबंधी दावे आरोप हैं, स्थापित तथ्य नहीं। इसलिए पाठकों के लिए आरोप और प्रमाणित जानकारी के बीच अंतर समझना जरूरी है। Post Views: 7 Post navigation TikTok के सह-संस्थापक झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर इंसान, गौतम अडानी को छोड़ा पीछे ‘मेरे पापा को वापस ला दीजिए’, हाथ जोड़कर बेटी की गुहार; 8 साल से सऊदी में फंसे इंद्रमणि, 2.29 करोड़ की देनदारी बनी घर वापसी में रोड़ा