देहरादून: देश के एयरपोर्ट्स पर विमानों की सुरक्षित उड़ान के सामने पक्षियों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के ताजा अध्ययन में देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट और अमृतसर एयरपोर्ट को बर्ड स्ट्राइक के लिहाज से संवेदनशील पाया गया है। अध्ययन में दोनों एयरपोर्ट क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें कई प्रजातियां विमानों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती हैं।

Writer by Mohit Kumar 

24-9-2026 3:52 pm

57 पक्षी प्रजातियां मिलीं, 13 हाई रिस्क

भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन के अनुसार देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट क्षेत्र में 57 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें टिटहरी, चील और कबूतर समेत 13 प्रजातियों को विमानों के लिए अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक रनवे और विमानों के उड़ान मार्ग के आसपास पक्षियों की मौजूदगी खासतौर पर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान चिंता का विषय बन सकती है। इस दौरान विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है, जिससे पक्षियों के साथ टकराव की आशंका बढ़ जाती है।

अमृतसर एयरपोर्ट पर भी 8 प्रजातियां उच्च जोखिम वाली

अध्ययन में अमृतसर एयरपोर्ट क्षेत्र में 50 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई। इनमें से 8 प्रजातियों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

इस तरह दोनों एयरपोर्ट क्षेत्रों में दर्ज पक्षियों में कुल 21 प्रजातियों को विमानों के लिए अधिक जोखिम वाली श्रेणी में चिह्नित किया गया है। बड़े आकार के पक्षियों के विमान से टकराने की स्थिति में विमान को नुकसान पहुंचने की आशंका अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती है।

जौलीग्रांट में पक्षियों की गतिविधियां बनी चुनौती

देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पक्षियों की संख्या और उनकी गतिविधियां विमान संचालन के लिए चुनौती बन रही हैं। रनवे के आसपास और उड़ान के रास्ते में पक्षियों की मौजूदगी बर्ड स्ट्राइक का खतरा बढ़ा सकती है।

कुछ समय पहले जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पक्षियों की मौजूदगी के कारण एक विमान को लैंडिंग से पहले काफी देर तक हवा में चक्कर लगाना पड़ा था। यह घटना बताती है कि एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखना कितना महत्वपूर्ण है।

क्या होता है बर्ड स्ट्राइक?

जब उड़ान भरते या उतरते समय कोई पक्षी विमान से टकराता है, तो इसे बर्ड स्ट्राइक या बर्ड हिट कहा जाता है। ऐसी घटनाओं में विमान के इंजन, विंडशील्ड, पंख या अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। जोखिम पक्षी के आकार, संख्या, विमान की गति और टकराव की जगह पर निर्भर करता है।

खासकर बड़े पक्षियों के साथ टकराव होने पर नुकसान की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की गतिविधियों की पहचान और निगरानी विमानन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

WII के 37वें वार्षिक अनुसंधान सेमिनार में सामने आया अध्ययन

यह जानकारी भारतीय वन्यजीव संस्थान के 37वें वार्षिक अनुसंधान सेमिनार के दौरान सामने आई। दो दिवसीय सेमिनार में वन्यजीव और जैव विविधता से जुड़े 60 से अधिक शोध पत्र और 41 पोस्टर प्रस्तुत किए गए।

सेमिनार के दूसरे दिन आठ तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इनमें वन्यजीव संरक्षण, पुनर्स्थापन, आवास और जैव विविधता में बदलाव, वन्यजीव गलियारे, आबादी आकलन, पर्यावरणीय बदलाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध प्रस्तुत किए गए।

संरक्षण में आधुनिक तकनीक और स्थानीय भागीदारी पर जोर

शोध समन्वयक बिवाश पांडव ने संरक्षण के प्रयासों में पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और तकनीक को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया।

वहीं, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अपर वन महानिदेशक (वन्यजीव) रमेश कुमार पांडे ने सेमिनार को शोधकर्ताओं के बीच विचारों, आंकड़ों और पद्धतियों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया।

सेमिनार की अध्यक्षता WII के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक जीएस रावत ने की। उद्घाटन सत्र में वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के पांच महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

WII निदेशक जीएस भारद्वाज ने कहा कि इस तरह के सेमिनार शोध को विशेषज्ञों के सामने रखने और उनसे मिलने वाली प्रतिक्रिया के माध्यम से उसकी गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच हैं।

जौलीग्रांट और अमृतसर एयरपोर्ट से जुड़े इस अध्ययन ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत को सामने रखा है। एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी प्राकृतिक जैव विविधता का हिस्सा है, लेकिन रनवे और उड़ान मार्गों के पास उनकी गतिविधियां विमानों के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऐसे में पक्षियों की निगरानी, जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के उपाय महत्वपूर्ण होंगे।

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