भारी बारिश से उत्तराखंड बेहाल

देहरादून/रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में लगातार बिगड़ते मौसम ने चारधाम यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सबसे ज्यादा असर रुद्रप्रयाग जिले में देखने को मिल रहा है, जहां केदारनाथ यात्रा मार्ग और बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अगले आदेश तक केदारनाथ यात्रा पर रोक लगा दी है।

Writer by Mohit Kumar 

27-9-2026 5:20 pm

करीब 4000 तीर्थयात्री रास्ते में फंसे

रुद्रप्रयाग में लैंडस्लाइड के कारण सड़क मार्ग बाधित होने से करीब 4000 तीर्थयात्री दोनों तरफ फंस गए हैं। भारी बारिश और लगातार गिर रहे मलबे के कारण यात्रियों को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। हाईवे पर मलबा हटाने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण सड़क को सुरक्षित तरीके से खोलना चुनौती बना हुआ है।

मौसम खराब होने के कारण केदारनाथ की हेली सेवाएं भी पहले से बंद हैं। ऐसे में सड़क मार्ग बाधित होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सिरोबगड़ में फिर बंद हुआ बद्रीनाथ हाईवे

रुद्रप्रयाग में सिरोबगड़ एक बार फिर भारी बारिश के बीच बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। धारी देवी मंदिर के पास पहाड़ी से अचानक बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरे। इसके बाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

सड़क बंद होने के बाद राजमार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की मशीनें मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण सड़क खोलने का काम सावधानी के साथ किया जा रहा है।

तीन दशक से सिरोबगड़ बना बरसात की चुनौती

सिरोबगड़ में लैंडस्लाइड की समस्या नई नहीं है। बरसात के मौसम में पिछले करीब तीन दशकों से यह क्षेत्र बद्रीनाथ हाईवे के लिए चुनौती बना हुआ है। बारिश शुरू होते ही पहाड़ी से मलबा और बड़े पत्थर गिरने लगते हैं, जिससे हाईवे बार-बार बंद हो जाता है।

हर साल प्रशासन और सड़क निर्माण से जुड़े विभाग मलबा हटाकर यातायात बहाल करते हैं, लेकिन भारी बारिश के दौरान समस्या दोबारा सामने आ जाती है। इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उत्तराखंड के कई जिलों में अलर्ट

मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। टिहरी, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी में रेड अलर्ट, जबकि नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में ऑरेंज अलर्ट बताया गया है।

इसके अलावा अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर और बागेश्वर में यलो अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 घंटे के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

मानसून सीजन में 1162 मिमी बारिश

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 25 सितंबर 2026 के बीच उत्तराखंड में करीब 1162 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। राज्य में इस अवधि में कुल बारिश सामान्य से लगभग एक प्रतिशत अधिक बताई गई है।

कुछ जिलों में बारिश सामान्य से कम रही, जबकि कुछ जिलों में काफी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। बागेश्वर में सामान्य से 153 प्रतिशत अधिक, चमोली में 65 प्रतिशत अधिक, अल्मोड़ा में 23 प्रतिशत अधिक, टिहरी में 25 प्रतिशत अधिक और हरिद्वार में 11 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

वहीं चंपावत, देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ा

भारी बारिश के कारण उत्तराखंड की प्रमुख नदियों अलकनंदा और मंदाकिनी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। रविवार को अलकनंदा का जलस्तर 626.100 मीटर, जबकि मंदाकिनी का जलस्तर625.100  मीटर दर्ज किया गया।

नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रुद्रप्रयाग का जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) अलर्ट मोड पर है।

प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से लोगों को नदी के करीब नहीं जाने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है।

प्रशासन अलर्ट, यात्रियों से सावधानी की अपील

मौसम खराब होने और लगातार भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट रखा गया है। मलबा हटाने वाली मशीनों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया है। हालांकि, पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने के कारण सड़क खोलने के काम में सावधानी बरती जा रही है।

चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे मौसम और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जब तक मार्ग सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

फिलहाल उत्तराखंड में भारी बारिश, लैंडस्लाइड और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने यात्रा और यातायात व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे यात्रियों की सुरक्षा और प्रभावित मार्गों को सुरक्षित तरीके से खोलना है।

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