रुड़की/बिहारीगढ़। कभी दिल्ली-देहरादून मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए खास पड़ाव माना जाने वाला बिहारीगढ़ का पकौड़ी बाजार अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी रौनक खोता जा रहा है। यहां की गर्मागर्म पकौड़ियां और चाय यात्रियों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय रही हैं। लेकिन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद वाहनों की आवाजाही पुराने बाजार से कम होने का असर यहां के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है।

Writer by Mohit Kumar 

28-9-2026 22:12 pm

दुकानदारों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे बनने के बाद बाजार में आने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है और उनका कारोबार करीब 70 फीसदी तक घट गया है। इससे कई दुकानदारों के सामने दुकान का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।

कभी यात्रियों का पसंदीदा पड़ाव था बाजार

बिहारीगढ़ का पकौड़ी बाजार दिल्ली, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों के बीच अपनी अलग पहचान रखता था। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान लोग यहां वाहन रोककर गर्मागर्म पकौड़ी और चाय का आनंद लेते थे। बाजार में करीब 48 दुकानें हैं और इनसे सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।

कई दुकानदारों का कहना है कि बाजार की पहचान सिर्फ खाने-पीने की दुकानों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह लंबे समय से यात्रियों के लिए एक जाना-पहचाना पड़ाव रहा है।

एक्सप्रेसवे ने बदला रास्ता, बाजार पर पड़ा असर

समय के साथ सड़क परिवहन की सुविधाएं बेहतर हुईं और दिल्ली-देहरादून के बीच सफर तेज और आसान हुआ। इसी क्रम में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ने यातायात का बड़ा हिस्सा अपने ऊपर ले लिया। बिहारीगढ़ में एक्सप्रेसवे का पुल बाजार के ऊपर से गुजर रहा है।

अब दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा करने वाले अधिकांश वाहन बिना पुराने बाजार में उतरे सीधे एक्सप्रेसवे से निकल जाते हैं। इसका सीधा असर बाजार में रुकने वाले यात्रियों की संख्या पर पड़ा है।

दुकानदार बोले- 70 फीसदी तक कम हुई बिक्री

पकौड़ी दुकानदार मनोज जायसवाल, योगेश कुमार, राकेश और शमशाद का कहना है कि पहले की तुलना में कारोबार में करीब 70 फीसदी तक गिरावट आई है। ग्राहकों की संख्या घटने से बिक्री कम हो गई है और कई दुकानदारों के लिए दुकान का किराया, बिजली और अन्य खर्च निकालना भी चुनौती बन गया है।

दुकानदारों के मुताबिक, कुछ दुकानें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य दुकानें भी बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। यदि बाजार तक यात्रियों की पहुंच आसान नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में यहां का पारंपरिक कारोबार और प्रभावित हो सकता है।

सर्विस रोड और स्पष्ट रास्ते की मांग

बाजार के दुकानदार अब प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि पुराने पकौड़ी बाजार को मुख्य मार्ग और एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए उचित सर्विस रोड और स्पष्ट प्रवेश-निकास मार्ग की व्यवस्था की जाए तो यात्रियों को बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी।

दुकानदारों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से पुराने बाजार की रौनक दोबारा लौट सकती है और उन परिवारों की आजीविका भी बचाई जा सकती है, जो वर्षों से पकौड़ी और अन्य खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े हुए हैं।

विकास के साथ पुरानी पहचान बचाने की चुनौती

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ने यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ पुराने मार्गों पर स्थित छोटे बाजारों और स्थानीय कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बिहारीगढ़ का पकौड़ी बाजार इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है।

अब चुनौती यह है कि तेज रफ्तार यातायात और आधुनिक सड़क व्यवस्था के साथ-साथ ऐसे पारंपरिक बाजारों को भी यात्रियों से जोड़कर रखा जाए, ताकि विकास की रफ्तार के बीच स्थानीय कारोबार और वर्षों पुरानी बाजार की पहचान पीछे न छूटे।

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