तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित धनुषकोडी भारत की उन अनोखी जगहों में से एक है, जहां समुद्र की खूबसूरती, इतिहास की दर्दनाक कहानी और धार्मिक आस्था एक साथ देखने को मिलती है। इसे अक्सर ‘भारत की आखिरी भूमि’ या ‘भारत की आखिरी सड़क’ कहा जाता है। कभी यहां एक जीवंत शहर हुआ करता था, लेकिन दिसंबर 1964 में आए विनाशकारी चक्रवात ने इसे खंडहरों में बदल दिया। आज यह जगह अपने वीरान रेलवे स्टेशन, पुराने चर्च, समुद्र तट और रामायण से जुड़े धार्मिक महत्व के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। Writer by Mohit Kumar 10-10-2026 6:18 pm कहां स्थित है धनुषकोडी? धनुषकोडी तमिलनाडु के रामेश्वरम के पास पंबन द्वीप के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित है। यह रामेश्वरम से लगभग 18 से 24 किलोमीटर की दूरी पर है और श्रीलंका के काफी नजदीक पड़ता है। यहां से समुद्र के पार श्रीलंका की दिशा में फैला हुआ क्षेत्र दिखाई देता है, हालांकि सामान्य परिस्थितियों में श्रीलंका तक सीधे पहुंचना संभव नहीं है। इस जगह की सबसे खास बात इसका भौगोलिक स्वरूप है। यहां जमीन की एक पतली पट्टी समुद्र के बीच दूर तक फैली हुई है। एक तरफ बंगाल की खाड़ी और दूसरी तरफ हिंद महासागर का विशाल जलक्षेत्र है। दोनों ओर समुद्र का नजारा अलग-अलग दिखाई देता है। बंगाल की खाड़ी का पानी कई बार अपेक्षाकृत शांत रहता है, जबकि हिंद महासागर की तरफ तेज लहरें और मजबूत समुद्री धाराएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि समुद्र की स्थिति मौसम के अनुसार बदलती रहती है। दिसंबर 1964 का विनाशकारी चक्रवात, जिसने शहर को उजाड़ दिया धनुषकोडी का इतिहास बेहद दर्दनाक है। दिसंबर 1964 में आए भीषण चक्रवात और समुद्री लहरों ने इस छोटे से तटीय शहर को पूरी तरह तबाह कर दिया था। उस समय धनुषकोडी में रेलवे स्टेशन, रेलवे लाइन, चर्च, स्कूल, दुकानें और रिहायशी इलाके मौजूद थे। यहां रेल और समुद्री मार्ग से आवाजाही होती थी, जिससे यह एक महत्वपूर्ण स्थानीय केंद्र बन गया था। चक्रवात के दौरान समुद्र में उठी विनाशकारी लहरों ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस आपदा में भारी जनहानि हुई और शहर का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया। उस समय पंबन से धनुषकोडी की ओर जा रही एक यात्री ट्रेन भी समुद्री लहरों की चपेट में आ गई थी, जिसमें सवार यात्रियों की जान चली गई। इस विनाशकारी घटना के बाद धनुषकोडी को रहने के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद यहां पहले जैसी आबादी और शहरी गतिविधियां कभी वापस नहीं लौटीं। इसी वजह से आज इसे ‘घोस्ट टाउन’ यानी भूतिया शहर के नाम से जाना जाता है। रामायण से जुड़ा है धनुषकोडी का धार्मिक महत्व धनुषकोडी का महत्व केवल इसके इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध भगवान श्रीराम और रामायण की कथा से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए लंका जाने हेतु वानर सेना की सहायता से रामसेतु का निर्माण करवाया था। धार्मिक परंपरा के अनुसार, धनुषकोडी वह स्थान है जहां से रामसेतु की शुरुआत मानी जाती है। ‘धनुषकोडी’ शब्द का अर्थ भी धार्मिक कथा से जोड़ा जाता है। इसका अर्थ है ‘धनुष का अंतिम सिरा’ या ‘धनुष का छोर’। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने धनुष से इस स्थान को चिह्नित किया था। रामसेतु को अंग्रेजी में एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है। यह उथले समुद्री क्षेत्रों और चूना-पत्थर जैसी संरचनाओं की एक श्रृंखला है, जो भारत और श्रीलंका के बीच फैली हुई है। इसके निर्माण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और भूवैज्ञानिक व्याख्याएं अलग-अलग हैं। धनुषकोडी में घूमने लायक प्रमुख स्थान 1. पुराना रेलवे स्टेशन धनुषकोडी का पुराना रेलवे स्टेशन यहां के इतिहास की याद दिलाता है। कभी यह स्टेशन यात्रियों की आवाजाही का महत्वपूर्ण केंद्र था, लेकिन 1964 के चक्रवात ने इसे नष्ट कर दिया। आज इसके बचे हुए अवशेष उस भयानक प्राकृतिक आपदा की कहानी बयां करते हैं। 2. पुराने चर्च के खंडहर यहां पुराने चर्च के अवशेष भी देखने को मिलते हैं। टूटी हुई दीवारें और खंडहर उस शहर की याद दिलाते हैं, जहां कभी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी। समुद्र के नजदीक स्थित ये अवशेष पर्यटकों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करते हैं। 3. अरिचल मुनाई अरिचल मुनाई को धनुषकोडी का अंतिम छोर माना जाता है। यहां पहुंचकर पर्यटक समुद्र के विशाल विस्तार और आसपास की रेतीली भूमि का अद्भुत दृश्य देख सकते हैं। यह स्थान फोटोग्राफी और प्राकृतिक नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है। समुद्र और जमीन के मिलते हुए दृश्य इसे खास बनाते हैं। 4. कोठंडारामस्वामी मंदिर कोठंडारामस्वामी मंदिर धनुषकोडी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध भगवान श्रीराम, विभीषण और रामायण की घटनाओं से है। कहा जाता है कि 1964 की प्राकृतिक आपदा के बावजूद यह मंदिर सुरक्षित रहा था। इसी कारण श्रद्धालुओं के बीच इसका विशेष महत्व है। धनुषकोडी क्यों है पर्यटकों के लिए खास? धनुषकोडी उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जिन्हें इतिहास, प्रकृति, समुद्र और धार्मिक स्थलों में रुचि है। यहां की सुनसान सड़कें, रेत से घिरे खंडहर और दूर तक फैला समुद्र एक अलग ही अनुभव देते हैं। यहां आने वाले पर्यटक एक तरफ समुद्र की खूबसूरती का आनंद लेते हैं, तो दूसरी तरफ उस शहर के अतीत को महसूस करते हैं, जो कभी आबाद था और एक भीषण चक्रवात के बाद वीरान हो गया। इसकी प्राकृतिक बनावट और रामायण से जुड़ी मान्यताएं इसे भारत के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाती हैं। हालांकि, यहां घूमने जाने वाले लोगों को समुद्र की स्थिति, मौसम और प्रशासन के निर्देशों का ध्यान रखना चाहिए। समुद्र में तेज धाराएं हो सकती हैं और कुछ इलाकों में प्रवेश प्रतिबंधित हो सकता है। इसलिए निर्धारित पर्यटन मार्गों पर ही जाना सुरक्षित रहता है। धनुषकोडी की यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान सही मौसम चुनें: अत्यधिक गर्मी और खराब मौसम के दौरान यात्रा करने से बचें। समुद्र से दूरी बनाए रखें: यहां तेज लहरें और खतरनाक धाराएं हो सकती हैं। बिना अनुमति समुद्र में उतरने से बचें। स्थानीय निर्देशों का पालन करें: अरिचल मुनाई और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से समय या प्रवेश संबंधी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पर्याप्त पानी साथ रखें: आसपास कई स्थानों पर सुविधाएं सीमित हो सकती हैं, इसलिए पीने का पानी और जरूरी सामान साथ रखें। खंडहरों को नुकसान न पहुंचाएं: पुराने भवनों और ऐतिहासिक अवशेषों को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। धनुषकोडी सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति की शक्ति, इतिहास की त्रासदी और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है। दिसंबर 1964 के चक्रवात ने जहां इस शहर की पुरानी पहचान मिटा दी, वहीं इसके खंडहर आज भी उस घटना की गवाही देते हैं। दूसरी ओर, रामायण से जुड़ी मान्यताएं और रामसेतु के निकट इसकी भौगोलिक स्थिति इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं। अगर आप तमिलनाडु की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो धनुषकोडी आपके लिए एक यादगार अनुभव हो सकता है। यहां समुद्र की खूबसूरती के साथ-साथ इतिहास के उन पन्नों को भी करीब से महसूस किया जा सकता है, जिन्हें समय पूरी तरह मिटा नहीं पाया है। Post Views: 1 Post navigation IND vs WI: 249 रन बनाकर भी हारी टीम इंडिया, श्रेयस अय्यर ने उठाए ‘सेफ स्कोर’ पर सवाल;