सोनम वांगचुक ने खत्म की 26 दिन की भूख हड़ताल, स्वास्थ्य स्थिर; सरकार के आश्वासन के बाद लिया बड़ा फैसला Writer by Mohit Kumar 1:27 25-7-2026pm नई दिल्ली/गुरुग्राम। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक मामले में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जारी अपनी 26 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। लंबे समय तक चले इस अनशन के बाद उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही थी। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर (Stable) है और वे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार प्राप्त कर रहे हैं। यह भूख हड़ताल देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले संगठनों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही। वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से था। डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य में सुधार दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदान्ता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहाँ उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। अस्पताल द्वारा जारी स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार उनके सभी प्रमुख अंग सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं और उनके वाइटल्स (Vital Signs) स्थिर हैं। हालांकि 26 दिनों के लंबे उपवास के कारण उनका शरीर काफी कमजोर हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार उन्होंने लगभग 11 किलोग्राम वजन और पर्याप्त मसल मास (Muscle Mass) खो दिया है। फिलहाल उन्हें विशेष डाइट, पोषण और मेडिकल केयर दी जा रही है ताकि उनका शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट सके। सबसे राहत की बात यह है कि वे पूरी तरह होश में हैं, बातचीत कर रहे हैं और मानसिक रूप से पूरी तरह सजग हैं। क्यों खत्म की 26 दिनों की भूख हड़ताल सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई को मेदान्ता अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में बताया कि सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने निम्न प्रमुख बिंदुओं पर सकारात्मक रुख दिखाया है— परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने का आश्वासन। NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार। आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं करने का भरोसा। वांगचुक ने कहा कि यदि इन आश्वासनों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय की जाएगी। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों का किया खंडन अनशन समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं कि उन्होंने सरकार के साथ कोई गुप्त समझौता (Secret Deal) किया है। सोनम वांगचुक ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने किसी प्रकार का निजी समझौता नहीं किया है और उनका निर्णय केवल छात्रों के हित तथा सरकार द्वारा दिए गए सार्वजनिक आश्वासनों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से बचें। छात्रों के भविष्य को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता वांगचुक ने कहा कि NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और देश की प्रतिभा पर लोगों के विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के लिए है जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। देशभर से मिला व्यापक समर्थन 26 दिनों तक चले इस आंदोलन को देश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग उठाई। 26 दिनों के संघर्ष के बाद टूटा अनशन, अब सरकार के एक्शन का इंतजार अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह आंदोलन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, लेकिन आंदोलन जारी: शिक्षा सुधार के वादों पर देश की निगाहें सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल का समाप्त होना आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में लगातार सुधार हो रहा है। दूसरी ओर, देशभर के छात्र और अभिभावक सरकार से किए गए वादों के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद लगाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कौन-कौन से ठोस कदम उठाती है। Post Views: 3 Post navigation 25 जुलाई 2026 का राशिफल: मेष, सिंह और तुला राशि वालों पर रहेगी किस्मत की मेहरबानी, सफलता और आर्थिक लाभ के बन रहे प्रबल योग छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल