हरिद्वार में संत समाज का बड़ा समागम, Writer by Mohit Kumar 25-8-2026 11: 56 pm टिप्पणी: हरिद्वार में संत समाज की ओर से आयोजित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और धर्माचार्यों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। संत समाज ने इसे चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने और बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाले खर्च व प्रशासनिक व्यस्तता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। हरिद्वार में आयोजित इस संत समागम का माहौल आध्यात्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों से भी जुड़ा रहा। संतों ने कहा कि देश में लगातार अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण लंबे समय तक चुनावी गतिविधियां चलती रहती हैं। इससे प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव बढ़ता है और विकास कार्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है। एक साथ चुनाव कराने पर जोर कार्यक्रम में संत समाज की ओर से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा को लेकर अपने विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि यदि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक निर्धारित व्यवस्था के तहत एक साथ कराए जाएं तो चुनाव प्रक्रिया में लगने वाले समय और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। संतों ने यह भी कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर चर्चा और जनजागरूकता जरूरी है। किसी भी बड़े चुनावी सुधार को लागू करने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और संबंधित पक्षों के विचारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हरिद्वार से राष्ट्रीय संदेश देने की कोशिश धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम को संत समाज की ओर से राष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी राय रखने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा गया। कार्यक्रम में मौजूद संतों ने राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव सुधार जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए लोगों से देशहित में जागरूक रहने का आह्वान किया। संत समाज का कहना रहा कि चुनाव लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें सुधार को लेकर होने वाली चर्चा व्यापक होनी चाहिए। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच हरिद्वार का यह समागम भी चर्चा का केंद्र बना। चुनावी खर्च और बार-बार आचार संहिता पर चर्चा कार्यक्रम में बार-बार चुनाव होने के कारण आने वाले खर्च और चुनावी प्रक्रिया के दौरान लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता का मुद्दा भी उठाया गया। संतों ने कहा कि लगातार चुनाव होने से राजनीतिक दलों के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था भी लंबे समय तक चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहती है। हालांकि, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लागू करना एक जटिल संवैधानिक और प्रशासनिक विषय है। इसके लिए संविधान, चुनावी कानूनों और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े कई पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी। संत समाज ने दिया एकजुटता का संदेश समागम के दौरान संत समाज ने देश की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर समाज को जागरूक करने की बात कही। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और चर्चा जरूरी है। हरिद्वार में आयोजित यह संत समागम ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस में संत समाज की भागीदारी के रूप में महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उठे मुद्दे आने वाले समय में चुनाव सुधार को लेकर होने वाली चर्चाओं को लेकर भी ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। Post Views: 2 Post navigation 153.6 KMPH की ‘गोली’ बनी कार्तिक त्यागी की गेंद, भारतीय बल्लेबाज चारों खाने चित; रिंकू सिंह ने लपका शानदार कैच उत्तराखंड में मिलावट और जमाखोरी पर शिकंजा, सभी जिलों में एक सप्ताह चलेगा विशेष अभियान