नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दीं। बाढ़ के तेज बहाव में फंसा जंगली हाथियों का एक झुंड बहते-बहते उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले तक पहुंच गया। झुंड में कुल पांच हाथी थे, जिनमें तीन बड़े हाथी और दो नन्हे बच्चे शामिल थे। राहत की बात यह रही कि सभी हाथी सुरक्षित बच गए। तेज पानी के बहाव में बहकर पहुंचे गिरिजापुरी बैराज Writer by Mohit Kumar 28-8-2026 3:45pm नेपाल में भारी बारिश के बाद नदियों में अचानक पानी बढ़ गया। इसी दौरान हाथियों का यह झुंड तेज बहाव की चपेट में आ गया। पानी की ताकत इतनी अधिक थी कि हाथी उसके साथ बहते हुए भारत की ओर आ गए और आखिरकार गिरिजापुरी बैराज तक पहुंच गए। बैराज के आसपास हाथियों को देखकर स्थानीय स्तर पर इसकी सूचना संबंधित विभागों को दी गई। इसके बाद वन विभाग और सिंचाई विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं। बड़े हाथियों ने बच्चों को अपने बीच रखा इस पूरी घटना में सबसे भावुक दृश्य यह रहा कि तेज बहाव के बावजूद बड़े हाथी दोनों छोटे बच्चों को अपने बीच रखकर उनकी सुरक्षा करते रहे। उन्होंने बच्चों को पानी के तेज बहाव से बचाने के लिए उन्हें अपने शरीर के बीच घेर लिया। मुश्किल परिस्थितियों में झुंड का एकजुट रहना वन्यजीवों के पारिवारिक व्यवहार की मजबूत मिसाल माना जा रहा है। प्रशासन ने कम किया पानी का वेग हाथियों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग और सिंचाई विभाग की टीमों ने तत्काल कदम उठाए। बैराज के गेट बंद कर पानी के बहाव को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, ताकि हाथियों पर तेज पानी का दबाव कम हो सके। पानी का वेग कम होने के बाद हाथियों के लिए नदी के किनारे पहुंचना आसान हुआ। टीमों ने लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। पांचों हाथी सुरक्षित, जंगल की ओर लौटे जलस्तर और बहाव कम होने के बाद पांचों हाथी सुरक्षित नदी किनारे पहुंचे। इसके बाद पूरा झुंड धीरे-धीरे जंगल की ओर चला गया। तीनों बड़े हाथी और दोनों नन्हे हाथी सुरक्षित बताए गए हैं। नेपाल की बाढ़ से बहकर भारत पहुंचे इस हाथियों के झुंड की कहानी ने यह भी दिखाया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वन्यजीव किस तरह कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। वहीं, दो छोटे हाथियों को बचाने के लिए बड़े हाथियों का सुरक्षा घेरा लोगों के लिए इस घटना का सबसे खास और भावुक पहलू बन गया। संकट में एकजुटता की मिसाल पांच हाथियों का यह झुंड बाढ़ के खतरनाक बहाव से जूझने के बाद सुरक्षित जंगल तक लौट गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि जंगल में रहने वाले हाथी केवल ताकतवर ही नहीं, बल्कि अपने झुंड के कमजोर और छोटे सदस्यों की रक्षा के लिए बेहद सतर्क और एकजुट भी रहते हैं। Post Views: 3 Post navigation रक्षाबंधन 2026: राखी बांधने के शुभ मुहूर्त, सही समय और जरूरी नियम 1 सितंबर से मुंबई में महंगा होगा दूध, थोक कीमत में ₹9 प्रति लीटर का बड़ा इजाफा