लखनऊ मेट्रो का पांडेगंज स्टेशन होगा बेहद खास, 35 से 37 मीटर गहराई में बनेगा पांच मंजिला स्टेशन; ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण से पुराने शहर में कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा। Writer by Mohit Kumar 15-10-2026 22:14 pm लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना के तहत एक ऐसा स्टेशन बनाने की योजना है, जो अपनी अनूठी इंजीनियरिंग और गहराई के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन सकता है। चारबाग से वसंतकुंज तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर बनने वाला पांडेगंज मेट्रो स्टेशन बेहद खास होगा। इस स्टेशन पर मेट्रो ट्रेनें सामान्य स्टेशनों की तरह अगल-बगल की पटरियों पर चलने के बजाय एक-दूसरे के ऊपर से गुजरेंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने इस स्टेशन के निर्माण के लिए रूट मैप तैयार कर लिया है। पांच मंजिला होगा पांडेगंज मेट्रो स्टेशन पांडेगंज मेट्रो स्टेशन को पांच मंजिला संरचना के रूप में विकसित करने की योजना है। इसकी प्रस्तावित गहराई करीब 35 से 37 मीटर बताई जा रही है। इतनी गहराई पर स्टेशन का निर्माण करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। स्टेशन के डिजाइन में यात्रियों की आवाजाही, मेट्रो ट्रेनों के संचालन और अन्य जरूरी सुविधाओं को ध्यान में रखा जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार, स्टेशन की निचली दो मंजिलों में मेट्रो ट्रेनों के ऊपर-नीचे गुजरने वाले रूट बनाए जाएंगे। बाकी तीन मंजिलों का उपयोग स्टेशन से जुड़ी दूसरी गतिविधियों और यात्री सुविधाओं के लिए किया जाएगा। इस तरह स्टेशन का ढांचा सामान्य मेट्रो स्टेशनों से अलग होगा और इसमें जगह का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा। जगह की कमी के कारण तैयार किया गया खास डिजाइन पांडेगंज मेट्रो स्टेशन का निर्माण पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले इलाके में किया जाना है। यहां आसपास पहले से ही कई महत्वपूर्ण संरचनाएं मौजूद हैं, जिसके कारण स्टेशन के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। स्टेशन के एक तरफ अंग्रेजों के समय का बना पुराना नाला है, जबकि दूसरी तरफ सिटी रेलवे स्टेशन और उसकी रेल पटरियां मौजूद हैं। ऐसे में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए सीमित जगह ही उपलब्ध हो पा रही है। इसी चुनौती को देखते हुए यूपीएमआरसी की तकनीकी टीम ने स्टेशन के डिजाइन और रूट की योजना तैयार की है। स्टेशन को पारंपरिक तरीके से बनाने के बजाय वर्टिकल यानी ऊपर-नीचे की व्यवस्था अपनाने का प्रस्ताव है। इससे सीमित जगह में भी मेट्रो संचालन के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। स्टेशन पर पहुंचते ही बदल जाएगी ट्रेनों की स्थिति पांडेगंज स्टेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका अलग तरह का ट्रैक सिस्टम होगा। सामान्य तौर पर मेट्रो की दोनों दिशाओं की ट्रेनें समानांतर पटरियों पर चलती हैं। लेकिन पांडेगंज में जगह की कमी के कारण दोनों रूट को अलग-अलग ऊंचाई पर रखने की योजना बनाई गई है। स्टेशन के पास पहुंचते ही एक मेट्रो ट्रेन ऊपर और दूसरी नीचे के ट्रैक पर आ जाएगी। स्टेशन से आगे निकलने के बाद दोनों ट्रेनें फिर से अपने सामान्य समानांतर रूट पर लौट जाएंगी। यह व्यवस्था इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए ट्रैक की बनावट, सुरंगों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रेनों के सुचारु संचालन की विस्तृत योजना तैयार करनी होगी। कोलकाता के मुकाबले भी होगी अधिक गहराई भारत में भूमिगत मेट्रो परियोजनाओं के लिए कोलकाता का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाली मेट्रो सुरंग और उससे जुड़ी संरचनाएं अपनी तकनीकी विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं। पांडेगंज स्टेशन की प्रस्तावित गहराई करीब 35 से 37 मीटर बताई जा रही है, जबकि खबर में कोलकाता की संबंधित मेट्रो संरचना की गहराई करीब 33 मीटर बताई गई है। यदि प्रस्तावित डिजाइन और गहराई के आंकड़े इसी रूप में लागू होते हैं, तो पांडेगंज स्टेशन देश के सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों में शामिल हो सकता है। हालांकि, इसे आधिकारिक तौर पर देश का सबसे गहरा स्टेशन घोषित किए जाने की पुष्टि और अंतिम निर्माण संबंधी आंकड़ों की जानकारी संबंधित विभाग से मिलना जरूरी है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से पुराने लखनऊ को मिलेगी राहत चारबाग से वसंतकुंज तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर लखनऊ के शहरी परिवहन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से जोड़ना है। पुराने लखनऊ में घनी आबादी, व्यस्त बाजार और सड़कों पर यातायात का दबाव परिवहन व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार यात्रियों को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकता है। पांडेगंज स्टेशन का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसकी खास डिजाइन न केवल सीमित जगह में निर्माण की चुनौती का समाधान पेश करेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक परिवहन परियोजनाओं के लिए किस तरह नए इंजीनियरिंग तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लखनऊ का प्रस्तावित पांडेगंज मेट्रो स्टेशन अपनी गहराई, पांच मंजिला संरचना और ऊपर-नीचे चलने वाली मेट्रो ट्रेनों की व्यवस्था के कारण खास पहचान बना सकता है। पुराने शहर में जगह की कमी के बावजूद मेट्रो स्टेशन तैयार करने की योजना राजधानी के परिवहन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, स्टेशन की अंतिम गहराई, निर्माण की समयसीमा और देश के सबसे गहरे स्टेशन का आधिकारिक दर्जा तय होने के लिए यूपीएमआरसी की पुष्टि और आगे की परियोजना संबंधी जानकारी का इंतजार करना होगा। Post Views: 2 Post navigation नाना पाटेकर की प्रेयर मीट में बॉलीवुड सितारों की कम मौजूदगी, CID फेम शिवाजी और तुकाराम मुंढे ने दी श्रद्धांजलि; भावुक हुए लोग नौकरी में 40 साल देने को तैयार, लेकिन अपने सपने को 3 साल क्यों नहीं? जानिए सफलता का असली मंत्र