फिल्म अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि देश के मौजूदा हालात और वैश्विक शांति को लेकर की गई उनकी टिप्पणियां हैं। शेखर सुमन के कार्यक्रम ‘शेखर टुनाइट’ के गांधी जयंती विशेष एपिसोड में संजय दत्त ने भारत में शांति, राजनीति और दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर अपने विचार मजाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज में रखे।

Writer by Mohit Kumar 

4-10-2026 22:35 pm

‘भारत में अब पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती’

कार्यक्रम के दौरान संजय दत्त ने कहा कि भारत के लोग बहुत अच्छे, बड़े दिल वाले और मेहमाननवाज हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती।

उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि देश में फिर से वही शांति और भाईचारे का माहौल लौटे। उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने उनके बयान को मौजूदा राजनीतिक माहौल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देखा।

पांच मिनट के लिए प्रधानमंत्री बने संजय दत्त

शो में संजय दत्त से कहा गया कि अगर उन्हें पांच मिनट के लिए देश का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिले तो वह देशवासियों को क्या संबोधित करेंगे। इसके बाद अभिनेता अपने लोकप्रिय किरदार ‘मुन्नाभाई’ के अंदाज में नजर आए और उन्होंने एक व्यंग्यात्मक भाषण दिया।

माइक चेक करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “चल रेला है, चलो देश में कुछ तो चल रेला है।”

इसके बाद उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मानते हुए कहा कि वह देश के लोगों के बीच रहेंगे और प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी खुशी मनाने विदेश नहीं जाएंगे। उनका यह अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आया और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा होने लगी।

गांधी जी के तीन बंदरों के साथ चौथे बंदर की बात

संजय दत्त ने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध तीन बंदरों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज देश को एक चौथे बंदर की जरूरत है। उनके मुताबिक, अगर कोई बुरी चीज देखे तो उसे सिर्फ नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ठीक करने की कोशिश भी करनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग बुरा देखकर आंखें बंद कर लें, बुरा सुनकर कान बंद कर लें और गलत बात पर मुंह बंद कर लें, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?

उनका संदेश था कि समाज में गलत चीजों के खिलाफ आवाज उठाने और उन्हें सुधारने की जिम्मेदारी भी लोगों की होनी चाहिए।

नेताओं की तस्वीरों पर भी किया तंज

संजय दत्त ने नेताओं की तस्वीरें लगाने की परंपरा पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि जहां किसी नेता की तस्वीर लगाने का मन हो, वहां महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई जानी चाहिए। उनके मुताबिक, किसी नेता की तस्वीर से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके विचार होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश को सबसे पहले ‘फ्रेम’ में रखना जरूरी है। उनके इस बयान को भी लोगों ने राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में देखा।

ट्रंप को ‘मामू’ कहकर दी गांधीगिरी की सलाह

संजय दत्त ने अपने भाषण में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री होते तो ट्रंप से कहते—“मामू, सब पर हमला-वमला नहीं करो।”

उन्होंने दुनिया में बढ़ते युद्ध और तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि एक देश दूसरे पर हमला करेगा तो प्रतिक्रिया में दूसरा देश किसी और पर हमला करेगा और फिर पूरी दुनिया ‘वैश्विक शांति’ की बात करेगी।

‘शांति बटन दबाने से नहीं, प्यार से आएगी’

संजय दत्त ने कहा कि शांति कोई ऐसी चीज नहीं है जो एक बटन दबाते ही कुछ मिनटों में आ जाए। उनके मुताबिक, शांति के लिए प्यार और बातचीत जरूरी है।

उन्होंने अपने मशहूर ‘गांधीगिरी’ वाले अंदाज में कहा कि दुनिया को मिसाइलों की नहीं, बल्कि प्यार की जरूरत है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में सुझाव दिया कि अगर किसी देश को मिसाइल भेजने का मन हो तो पहले गुलदस्ता भेजना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी को धमकी देने के बजाय फोन करके चाय पर बुलाना और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करना ज्यादा बेहतर तरीका है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

संजय दत्त की इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके ‘मुन्नाभाई’ वाले अंदाज और गांधीगिरी के संदेश की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनके ‘भारत में शांति महसूस नहीं होती’ वाले बयान को राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।

हालांकि, कार्यक्रम में संजय दत्त का पूरा संबोधन मुख्य रूप से व्यंग्य, हास्य और गांधीवादी विचारों के जरिए शांति का संदेश देने पर केंद्रित था। उनके प्रधानमंत्री बनने की बात भी कार्यक्रम में एक काल्पनिक और मजाकिया स्थिति के तौर पर रखी गई थी।

कुल मिलाकर, संजय दत्त ने इस बातचीत में राजनीति से ज्यादा शांति, प्यार, बातचीत और गांधीगिरी को महत्व देने का संदेश दिया। यही वजह है कि उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

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