शिक्षा सुधार की मांग पर उबाल: ‘सरकार को संस्थाओं की विफलता के लिए जवाबदेह होना होगा’, सोनम वांगचुक के समर्थन में हजारों लोगों का संसद मार्च

Writer by Mohit Kumar 

20-7-2026 pm 

नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर हजारों लोग संसद की ओर मार्च करने के लिए जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं। प्रदर्शन स्थल पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।

पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी, फिर भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दी गई है और बिना अनुमति किसी भी रैली या मार्च की इजाजत नहीं होगी। इसके बावजूद आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने के लिए मार्च करेंगे।

आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद बढ़ा तनाव

शनिवार को स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को पुलिस अस्पताल ले गई। वांगचुक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, संस्थागत पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहे हैं।

उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया।

सरकार को जवाबदेह होना होगा

आंदोलन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब सरकारी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहती हैं, तो सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता को अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का भी अधिकार है।

उन्होंने कहा, “जब संस्थाएं अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पातीं, तब सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।”

असहमति को राष्ट्र-विरोधी बताना चिंता का विषय

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यह भी चिंता जताई कि देश में आलोचना और असहमति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। उनका कहना है कि कई बार सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को “राष्ट्र-विरोधी” या विदेशी हितों से प्रेरित बताकर उनकी बातों को खारिज कर दिया जाता है।

हालांकि, केंद्र सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं तथा सभी नागरिकों को कानून के दायरे में अपनी बात रखने का अधिकार है।

मैं सिर्फ़ तमाशबीन बनकर नहीं रह सकता था

आंदोलन में शामिल एक समर्थक ने कहा कि वे केवल दर्शक बनकर नहीं रह सकते थे। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि इस आंदोलन में मेरा मौजूद रहना ज़रूरी है। मैं सिर्फ़ किनारे खड़े होकर यह सब नहीं देख सकता था।”

उनके इस बयान को प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक भागीदारी और नागरिक जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)

नाम से राजनीतिक दल जैसी लगने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) वास्तव में कोई पंजीकृत राजनीतिक पार्टी नहीं है। इसकी शुरुआत एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह शिक्षा सुधार, संस्थागत जवाबदेही और युवाओं के मुद्दों को उठाने वाला एक व्यापक सामाजिक अभियान बन गया। सोशल मीडिया और विभिन्न नागरिक समूहों के समर्थन के कारण इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

आगे क्या ?

संसद मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने पर अड़े हुए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज़ होता है।

यह आंदोलन केवल शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लोकतांत्रिक अधिकारों, संस्थागत जवाबदेही और नागरिक भागीदारी पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा भी माना जा रहा है।

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