उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में बच्चों को मोबाइल फोन की बढ़ती लत से दूर करने के लिए कराई गई एक जागरूकता गतिविधि विवादों में आ गई है। स्कूल में आयोजित नाटक के दौरान बच्चों को मोबाइल के नुकसान समझाने के लिए ऐसा दृश्य दिखाया गया कि कई बच्चे डर गए और रोने लगे। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। Writer by Mohit Kumar 24-9-2026 3:25 pm क्या है पूरा मामला? मामला खटीमा के बिरिया मझोला स्थित एक निजी स्कूल का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, बच्चों के अभिभावक लगातार शिकायत कर रहे थे कि स्कूल से घर लौटने के बाद बच्चे काफी समय मोबाइल, गेमिंग और दूसरी स्क्रीन पर बिताते हैं। अभिभावकों की चिंता के बाद स्कूल में मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल के नुकसान को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नाटक के जरिए मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को दिखाने की कोशिश की गई। एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधी गई और लाल रंग का इस्तेमाल करके ऐसा दृश्य बनाया गया, मानो उसकी आंखों में गंभीर चोट लगी हो। इसके बाद बच्चे ने कथित तौर पर दूसरे विद्यार्थियों से कहा कि ज्यादा मोबाइल चलाने के कारण डॉक्टर ने उसकी आंखें निकाल दीं। डर गए छोटे बच्चे यह दृश्य देखकर कई छोटे बच्चे घबरा गए। वायरल वीडियो में कुछ बच्चे रोते और डरे-सहमे नजर आए। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ बच्चों ने हाथ जोड़कर कहा कि वे अब मोबाइल नहीं चलाएंगे। यहीं से इस जागरूकता कार्यक्रम के तरीके पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि बच्चों को मोबाइल के नुकसान के बारे में जागरूक करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए डर पैदा करने वाला तरीका अपनाना उचित है या नहीं, यह विचार का विषय है। स्कूल ने क्या कहा? स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें मोबाइल और स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल के संभावित नुकसान के प्रति जागरूक करना था। स्कूल का कहना है कि कई अभिभावकों ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताई थी और इसी के बाद यह पहल की गई। कुछ अभिभावकों ने भी कार्यक्रम के उद्देश्य का समर्थन किया और दावा किया कि इसके बाद बच्चों ने मोबाइल का इस्तेमाल कम किया। प्रशासन ने दिए जांच के आदेश वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा। ऊधम सिंह नगर के जिला शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए है खटीमा के एसडीएम तुषार सैनी ने भी कहा कि बच्चों के बीच डर का माहौल पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए। उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को मोबाइल से दूर रखने का सही तरीका क्या? मोबाइल और स्क्रीन टाइम को लेकर बच्चों की आदत पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप व्यवहारिक तरीके अपनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। घर में कुछ समय को ‘नो फोन जोन’ बनाया जा सकता है। खाना खाते समय मोबाइल और टीवी से दूरी रखकर परिवार के साथ बातचीत की आदत डाली जा सकती है। बच्चों के लिए उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने के साथ-साथ उन्हें खेलकूद, किताबों और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त किया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि बच्चों को मोबाइल के नुकसान समझाते समय उन्हें डराने के बजाय समझाने और उदाहरण देकर जागरूक करने पर जोर दिया जाए। खटीमा की यह घटना एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है—बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने के लिए जागरूकता जरूरी है, लेकिन जागरूकता का तरीका भी बच्चों की उम्र और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। Post Views: 8 Post navigation देहरादून में नियो मेट्रो नहीं, अब दौड़ेगी 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस; इन प्रमुख सड़कों पर बनेगा ई-बीआरटीएस कॉरिडोर देहरादून और अमृतसर एयरपोर्ट पर बर्ड स्ट्राइक का खतरा, चील-कबूतर समेत 21 प्रजातियां हाई रिस्क