देहरादून: राजधानी देहरादून में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव सामने आया है। लंबे समय से प्रस्तावित नियो मेट्रो की जगह अब इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-बीआरटीएस) को लेकर योजना तैयार की जा रही है। इस सिस्टम के तहत 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें शहर की प्रमुख सड़कों पर बने समर्पित कॉरिडोर में दौड़ेंगी।

Writer by Mohit Kumar 

24-9-2026 11:40 pm

एलिवेटेड फ्लाईओवर की तर्ज पर तैयार होगा सिस्टम

ई-बीआरटीएस कॉरिडोर को सामान्य ट्रैफिक से अलग रखने की योजना है। इसके लिए शहर की मुख्य सड़कों के बीच मौजूद डिवाइडर वाले हिस्से में पिलर खड़े कर कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। योजना को इस तरह डिजाइन करने पर जोर दिया जा रहा है कि निर्माण के दौरान भी सड़क यातायात कम से कम प्रभावित हो।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूएमआरसी) इस परियोजना पर काम कर रहा है। चूंकि प्रस्तावित सिस्टम सड़कों के ऊपर बनाया जाना है, इसलिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का सहयोग भी लिया जा रहा है।

दो प्रमुख कॉरिडोर से जुड़ेगा देहरादून

प्रस्तावित ई-बीआरटीएस सिस्टम के तहत शहर में दो प्रमुख कॉरिडोर बनाए जाने की योजना है।

पहला कॉरिडोर:

प्रेमनगर से शुरू होकर बल्लूपुर चौक, किशननगर चौक, घंटाघर, आराघर चौक, नेहरू कॉलोनी, अपर नत्थनपुर, ऑर्डिनेंस फैक्टरी और हाथीखाना चौक होते हुए रायपुर तक जाने का प्रस्ताव है।

दूसरा कॉरिडोर:

आईएसबीटी से लालपुल, सहारनपुर चौक, रेलवे स्टेशन, घंटाघर, गांधी पार्क और दिलाराम चौक होते हुए मसूरी डायवर्जन तक कॉरिडोर तैयार करने की योजना है।

जाम से राहत देने के लिए अलग लेन

ई-बीआरटीएस की सबसे बड़ी खासियत इसका डेडिकेटेड कॉरिडोर होगा। 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें सामान्य वाहनों से अलग निर्धारित लेन में चलेंगी। इससे बसों को ट्रैफिक जाम में फंसने से बचाने और यात्रियों का सफर तेज करने में मदद मिल सकती है।

यह सिस्टम पूरी तरह बिजली से संचालित होगा। इसलिए इसे पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में कम प्रदूषण वाला सार्वजनिक परिवहन विकल्प माना जा रहा है।

मेट्रो जैसी टिकटिंग और चार्जिंग सुविधा

प्रस्तावित सिस्टम में यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशनों पर ऑफ-बोर्ड टिकटिंग की व्यवस्था रखने की योजना है। यानी यात्रियों को बस में चढ़ने के बजाय स्टेशन पर ही टिकटिंग प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिल सकती है।

मुख्य टर्मिनलों पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशन भी विकसित किए जाने का प्रस्ताव है।

डिवाइडर की जगह बढ़ाने की चुनौती

पीडब्ल्यूडी के अनुसार वर्तमान में कई सड़कों पर डिवाइडर की चौड़ाई करीब आधा मीटर है, जबकि ई-बीआरटीएस के लिए प्रस्तावित गोल पिलर लगभग डेढ़ मीटर जगह घेर सकते हैं। ऐसे में सड़क की मौजूदा चौड़ाई में यातायात व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

इसी वजह से कुछ स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण, भूमि अधिग्रहण और फुटपाथ निर्माण की जरूरत बताई गई है।

570 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

परियोजना से जुड़ी आवश्यक तैयारियों के तहत करीब 570 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें सड़क चौड़ीकरण, आवश्यक भूमि अधिग्रहण और फुटपाथ निर्माण जैसे कार्य शामिल किए जाने की बात कही गई है।

पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार ई-बीआरटीएस योजना पर यूएमआरसी काम कर रहा है और सड़क यातायात को प्रभावित किए बिना निर्माण की दिशा में विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

देहरादून के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव

यदि प्रस्तावित योजना आगे बढ़ती है तो देहरादून में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नियो मेट्रो के बजाय इलेक्ट्रिक बस आधारित यह सिस्टम शहर के प्रमुख इलाकों को जोड़ने के साथ-साथ यात्रियों को तेज और अधिक व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।

हालांकि परियोजना के निर्माण, भूमि अधिग्रहण, सड़क चौड़ीकरण और अंतिम डिजाइन से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक समयसीमा और अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।

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