उत्तराखंड में आने वाले वर्षों में शहरी और क्षेत्रीय परिवहन की तस्वीर बदलने वाली कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें देहरादून में मेट्रो/मेट्रोलाइट या मेट्रो नियो जैसी प्रणाली और मेरठ से हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश तक नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर प्रमुख हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं के अलग-अलग चरणों में प्रस्ताव, DPR और मंजूरी की स्थिति है, इसलिए इन्हें अभी पूरी तरह तैयार परियोजना मानना सही नहीं होगा।

Writer by Mohit Kumar 

23-9-2026 10:5 pm

150 किलोमीटर का नमो भारत कॉरिडोर

दिल्ली-मेरठ RRTS को मेरठ के मोदीपुरम से आगे उत्तराखंड तक बढ़ाने को केंद्र से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित कॉरिडोर करीब 150 किलोमीटर लंबा है और मेरठ क्षेत्र से होते हुए मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश को जोड़ेगा। इसके लिए DPR सर्वे का काम भी आगे बढ़ रहा ह

प्रस्तावित मार्ग में प्रमुख पड़ावों के तौर पर दौराला, खतौली, मुजफ्फरनगर, पुरकाजी, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश शामिल किए गए हैं। इससे दिल्ली-NCR से उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्रों के बीच तेज क्षेत्रीय रेल संपर्क विकसित करने का लक्ष्य है।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना पूरी होने पर दिल्ली से ऋषिकेश की यात्रा का समय मौजूदा सड़क यात्रा की तुलना में काफी कम हो सकता है; रिपोर्ट में करीब 3 घंटे का संभावित यात्रा समय बताया गया है

हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच मेट्रो का प्रस्ताव

दूसरी ओर, उत्तराखंड मेट्रो रेल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (UKMRC) की DPR में हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रोलाइट कॉरिडोर का भी प्रस्ताव है। आधिकारिक DPR में इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 34.15 किलोमीटर बताई गई ह

UKMRC के पुराने दस्तावेजों में भी हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच करीब 34.148 किलोमीटर के नेटवर्क और 20 स्टेशनों वाले Metro Neo प्रोजेक्ट का उल्लेख मिलता है

इसका उद्देश्य हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और स्थानीय यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों व तीर्थयात्रियों को वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।

देहरादून में मेट्रो नियो का प्रस्ताव

देहरादून के लिए भी मेट्रो नियो/मेट्रोलाइट आधारित परिवहन व्यवस्था का प्रस्ताव लंबे समय से तैयार किया गया है। UKMRC की परियोजना योजनाओं में शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले कॉरिडोर शामिल रहे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों में ISBT-गांधी पार्क और FRI-रायपुर जैसे कॉरिडोर का उल्लेख मिलता

इस तरह देहरादून में शहरी परिवहन और हरिद्वार-ऋषिकेश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को अलग-अलग परियोजनाओं के जरिए मजबूत करने की योजना है।

क्या एक ही ट्रैक पर मेट्रो और नमो भारत चलेगी?

यह बात परियोजनाओं के अंतिम डिजाइन और तकनीकी मंजूरी पर निर्भर करेगी। प्रस्तावित योजनाओं में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में तेज क्षेत्रीय रेल और शहरी रेल कनेक्टिविटी को एक-दूसरे से जोड़ने की परिकल्पना की जा रही है, लेकिन एक ही ट्रैक पर दोनों सेवाओं के संचालन को अंतिम रूप से स्वीकृत व्यवस्था के रूप में अभी नहीं बताया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नेटवर्क?

उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचते हैं। सड़क मार्ग पर बढ़ता दबाव, पर्यटन सीजन में ट्रैफिक और शहरों के भीतर जाम जैसी समस्याओं को देखते हुए तेज सार्वजनिक परिवहन का विस्तार महत्वपूर्ण हो सकता है।

अगर प्रस्तावित परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो दिल्ली-NCR → मेरठ → मुजफ्फरनगर → रुड़की → हरिद्वार → ऋषिकेश के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। वहीं देहरादून और हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में स्थानीय सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ सकते हैं।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नमो भारत विस्तार को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और DPR प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि उत्तराखंड की मेट्रो/मेट्रोलाइट योजनाएं DPR और परियोजना-स्वीकृति के अलग-अलग चरणों में हैं। �

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