इंटेलिजेंस यानी AI ने हमारी जिंदगी के काम करने और सीखने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। अब इसी बदलाव को लेकर Nvidia के CEO जेन्सन हुआंग का एक बयान चर्चा में है। उन्होंने AI के बढ़ते इस्तेमाल, इंसानी याददाश्त और छात्रों की बुनियादी गणितीय क्षमताओं को लेकर अपनी राय रखी है।

Writer by Mohit Kumar 

27-9-2026 18:48 pm

एक बातचीत के दौरान हुआंग ने कहा कि आज के समय में कुछ ऐसी जानकारियां याद रखना जरूरी नहीं रह गया है, जिन्हें पहले लोग अपनी स्मृति में रखते थे। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें खुद अपना घर का पता और फोन नंबर याद नहीं रहता। उनके मुताबिक, जब तकनीक इन जानकारियों को जरूरत पड़ने पर उपलब्ध करा सकती है, तो इंसान को अपनी मानसिक ऊर्जा दूसरी महत्वपूर्ण चीजों के लिए इस्तेमाल करनी चाहिए।

‘अब पहाड़े रटने की जरूरत नहीं’

AI के दौर में शिक्षा का स्वरूप किस तरह बदल सकता है, इस सवाल पर हुआंग ने बुनियादी गणित को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शायद वह सब कुछ याद रखने की जरूरत नहीं होगी, जो पिछली पीढ़ियां याद करती थीं।

उन्होंने उदाहरण के तौर पर पहाड़े, लॉन्ग डिवीजन और स्क्वायर रूट जैसी चीजों का जिक्र किया। उनका तर्क है कि AI और कंप्यूटिंग टूल्स जब इस तरह के रूटीन कैलकुलेशन कर सकते हैं, तो छात्र अपनी ऊर्जा दूसरी तरह की क्षमताओं को विकसित करने में लगा सकते हैं।

हुआंग के मुताबिक, बुनियादी गणित की कुछ क्षमताओं के कम इस्तेमाल को तकनीकी विकास की एक कीमत के तौर पर देखा जा सकता है। उनके अनुसार, जब मशीनें छोटे और दोहराव वाले काम संभालेंगी, तो इंसान जटिल समस्याओं, रचनात्मक सोच और बड़े स्तर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।

खुद जेन्सन हुआंग ने सुनाया याददाश्त का अनुभव

जेन्सन हुआंग ने बातचीत के दौरान अपने अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अपना घर का पता और फोन नंबर तक याद नहीं रहता।

उन्होंने एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार वह अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाने गए थे। भुगतान के दौरान उनसे कार्ड का ZIP कोड पूछा गया, लेकिन उन्हें वह याद नहीं आया। इस स्थिति ने उन्हें कुछ समय के लिए परेशान किया।

हालांकि, हुआंग का कहना था कि वह ऐसी जानकारियों को याद रखने में अपनी मानसिक क्षमता खर्च नहीं करना चाहते। उनके अनुसार, अगर किसी जानकारी को जरूरत पड़ने पर तकनीक की मदद से हासिल किया जा सकता है, तो उसे हर समय दिमाग में रखने की आवश्यकता नहीं है।

AI और छात्रों की सोचने की क्षमता पर बहस

हुआंग की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब शिक्षा में AI के इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है। एक तरफ AI छात्रों को जानकारी खोजने, कठिन सवाल समझने, लेखन और समस्या समाधान में मदद कर रहा है। दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर विद्यार्थी हर समस्या का समाधान AI से लेने लगें तो क्या उनकी खुद सोचने और समस्या हल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है?

बातचीत में 26,000 छात्रों से जुड़ी एक चीनी स्टडी का संदर्भ भी सामने आया। इस संदर्भ में AI के अत्यधिक इस्तेमाल और कॉग्निटिव स्किल्स यानी सोचने-समझने की क्षमताओं के बीच संभावित संबंध पर चर्चा हुई।

हुआंग ने इस संभावना को खारिज नहीं किया कि AI के अत्यधिक इस्तेमाल से कुछ बुनियादी मानसिक कौशल कमजोर पड़ सकते हैं। उन्होंने माना कि आज के बच्चों के लिए लॉन्ग डिवीजन या स्क्वायर रूट जैसे काम पहले की तुलना में कठिन महसूस हो सकते हैं।

क्या बुनियादी गणित भूलना नुकसानदायक है

यही वह सवाल है जिसने इस पूरे विषय को बहस का मुद्दा बना दिया है। अगर AI हर कैलकुलेशन कर सकता है तो क्या पहाड़े याद करना जरूरी है? या फिर बुनियादी गणित की समझ ही आगे की जटिल सोच की नींव तैयार करती है?

AI के समर्थकों का तर्क है कि इंसान को मशीन की नकल करने की जरूरत नहीं है। अगर AI कुछ सेकंड में गणना कर सकता है, तो इंसान को अपना समय रचनात्मकता, तर्क, निर्णय लेने और जटिल समस्याओं को समझने में लगाना चाहिए।

वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों की एक अलग चिंता है। उनका तर्क है कि बुनियादी गणित केवल उत्तर निकालने का तरीका नहीं है, बल्कि संख्या-बोध, तार्किक सोच और समस्या को समझने की क्षमता विकसित करने का माध्यम भी है। इसलिए केवल कैलकुलेटर या AI पर निर्भरता बढ़ाना शिक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।

‘बड़ी सोच’ बनाम ‘बुनियादी कौशल’ की बहस

हुआंग का नजरिया इस बहस को एक बड़े सवाल तक ले जाता है—क्या तकनीक के विकास के साथ इंसान को कुछ पुराने कौशल छोड़ देने चाहिए?

इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है। तकनीक ने इंसानों के कई काम आसान किए हैं और कुछ पुराने कौशलों की जरूरत कम हुई है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में चुनौती यह है कि यह तय किया जाए कि कौन-सी चीज केवल गणना का कौशल है और कौन-सी चीज भविष्य की सोच की नींव है।

उदाहरण के लिए, किसी कठिन गणितीय गणना को AI से करवाना अलग बात है और गणितीय समस्या को समझना अलग। इसी तरह किसी तथ्य को इंटरनेट से खोज लेना अलग बात है और उस जानकारी की विश्वसनीयता को परखना अलग।

AI के दौर में शिक्षा का भविष्य कैसा होगा

जेन्सन हुआंग के बयान ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि आने वाले वर्षों में बच्चों को आखिर क्या पढ़ाया जाना चाहिए। क्या उन्हें ज्यादा से ज्यादा चीजें याद कराई जाएं या उन्हें AI के साथ काम करना सिखाया जाए?

संभव है कि भविष्य की शिक्षा में दोनों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया जाए। छात्रों के लिए बुनियादी गणित, भाषा, तर्क और सामान्य समझ जरूरी रहें, लेकिन इसके साथ उन्हें AI टूल्स का सही इस्तेमाल, जानकारी की जांच और स्वतंत्र सोच भी सिखाई जाए।

क्योंकि AI किसी सवाल का जवाब दे सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह जवाब हर परिस्थिति में सही हो। ऐसे में सवाल पूछने, जवाब को परखने और सही निर्णय लेने की क्षमता इंसान के लिए महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।

जेन्सन हुआंग का यह बयान सिर्फ पहाड़े याद करने या न करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे असली सवाल यह है कि AI इंसानी दिमाग की क्षमताओं को मजबूत करेगा या कुछ बुनियादी कौशलों पर हमारी निर्भरता कम कर देगा।

एक ओर AI कठिन और समय लेने वाले कामों को आसान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर सीखने और सोचने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती शायद यह नहीं होगी कि इंसान AI से कितना काम करवा सकता है, बल्कि यह होगी कि AI का इस्तेमाल करते हुए इंसान अपनी सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को कैसे मजबूत बनाए रखता है।

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