‘उनका विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत था Writer by Mohit Kumar 30 juli 2026 3:17 pm गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक और गुरु रमाकांत आचरेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में सचिन ने कहा कि उनके गुरु का उन पर अटूट विश्वास और अनुशासन ही उन्हें विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचाने की सबसे बड़ी प्रेरणा बना। गुरु पूर्णिमा पर सचिन ने याद किए आचरेकर सर टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2026) के मौके पर अपने कोच रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) को याद किया. दिग्गज तेंदुलकर ने मुंबई के शिवाजी पार्क में स्थित आचरेकर के मेमोरियल से कुछ तस्वीरें शेयर कीं. सचिन ने लिखा कि गुरु केवल खेल की तकनीक ही नहीं सिखाते, बल्कि जीवन में सही दिशा भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि आचरेकर सर ने हमेशा उन्हें मेहनत, समर्पण और विनम्रता का महत्व समझाया। यही सीख उनके पूरे क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी पूंजी रही। अपनी बात को बढ़ाते हुए उन्होंने आगे लिखा, “मुझ पर यकीन करने, गाइड करने और वो इंसान बनाने के लिए थैंक्यू जो आज मैं हूं. गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं, आचरेकर सर.” बता दें कि कोच रमाकांत आचरेकर को क्रिकेट का द्रोणाचार्य कहा जाता है. उन्होंने सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को कोच किया. इसके अलावा भी उन्होंने कई भारतीय खिलाड़ियों को कोचिंग दी. सचिन अक्सर खास मौकों पर अपने गुरु को याद करते हैं. 24 साल का सुनहरा करियर 2024 में मुंबई के शिवाजी पार्क में रमाकांत आचरेकर का मेमोरियल बनाया गया था. उन्होंने भारत को सचिन तेंदुलकर जैसा बल्लेबाज देकर भारतीय क्रिकेट में बड़ा योगदान दिया. सचिन तेंदुलकर का अंतर्राष्ट्रीय करियर नजर डालें सचिन तेंदुलकर के अंतर्राष्ट्रीय करियर पर, तो उन्होंने 200 टेस्ट, 463 वनडे और 1 टी20 इंटरनेशनल मुकाबला खेला. उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर 24 साल का रहा. टेस्ट की 329 पारियों में बैटिंग करते हुए दिग्गज तेंदुलकर ने 53.78 की औसत से 15921 रन बनाए, जिसमें 51 शतक और 68 अर्धशतक शामिल रहे. वनडे की 452 पारियों में तेंदुलकर ने 44.83 की औसत से 18426 रन स्कोर किए, जिसमें 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल रहे. बाकी टी20 इंटरनेशनल की इकलौती पारी में उन्होंने सिर्फ 10 रन बनाए. सचिन ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह एक युवा खिलाड़ी थे, तब आचरेकर सर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। कठिन अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास की सीख ने उन्हें दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में शामिल होने की राह दिखाई। रमाकांत आचरेकर से मिली प्रेरणा, सचिन तेंदुलकर गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर सचिन का यह भावुक संदेश लाखों क्रिकेट प्रेमियों को भी भावुक कर गया। प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनके संदेश की सराहना करते हुए आचरेकर सर को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि एक महान खिलाड़ी के पीछे एक महान गुरु का योगदान हमेशा अमूल्य होता है। सचिन तेंदुलकर और रमाकांत आचरेकर का रिश्ता भारतीय खेल इतिहास में गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे प्रेरणादायक उदाहरण माना जाता है। यह संदेश एक बार फिर याद दिलाता है कि सफलता की हर ऊंचाई के पीछे किसी गुरु का मार्गदर्शन और विश्वास जरूर होता है। Post Views: 1 Post navigation देहरादून में 16 करोड़ की लागत से बना पुल बारिश में धंसा, मरम्मत कार्य शुरू; निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल