नई दिल्ली: ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम में कथित गड़बड़ियों और यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रेल मंत्रालय और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) से इस मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र और रेलवे की ओर से पेश वकील को संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेने और एक सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

Writer by Mohit Kumar 

1-10 -2026 6:18 pm

यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें भारतीय रेलवे के यात्री रिजर्वेशन सिस्टम की स्वतंत्र जांच और ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिका में IRCTC के साथ-साथ RailOne और उससे जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम में कथित गड़बड़ियों का आरोप

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका वकील शुभम कुमार की ओर से दाखिल की गई है।

याचिका में ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें अलग-अलग कोटा के संभावित गलत इस्तेमाल, ऑटोमेटेड बुकिंग और बॉट के जरिए बड़े पैमाने पर टिकट बुक किए जाने की आशंका का मुद्दा उठाया गया है।

याचिकाकर्ता ने यह भी जांच कराने की मांग की है कि क्या अधिकृत एजेंटों, बिचौलियों या किसी ऑटोमेटेड सिस्टम को आम यात्रियों की तुलना में ऐसी कोई तकनीकी या अन्य सुविधा मिल रही है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

टिकट के पैसे कटे, लेकिन टिकट जारी नहीं हुआ तो क्या होगा?

ऑनलाइन टिकट बुकिंग से जुड़ी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक उन मामलों को लेकर है, जब यात्री के बैंक खाते से टिकट की रकम कट जाती है, लेकिन टिकट जारी नहीं होता।

ऐसी स्थिति में यात्री को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एक तरफ खाते से पैसा कट जाता है और दूसरी तरफ सीट भी नहीं मिलती। जब तक ट्रांजैक्शन की स्थिति स्पष्ट होती है, तब तक संबंधित ट्रेन में उपलब्ध सीट या बर्थ किसी दूसरे यात्री को मिल सकती है।

याचिका में मांग की गई है कि ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए। सिस्टम को जल्द यह बताना चाहिए कि ट्रांजैक्शन सफल हुआ, असफल रहा या किसी तकनीकी कारण से बीच में अटक गया। यदि रकम वापस की जानी है तो उसे निर्धारित समयसीमा के भीतर यात्री के खाते में लौटाने की व्यवस्था की मांग भी की गई है।

RAC, वेटिंग और स्पेशल कोटे की भी जांच की मांग

जनहित याचिका में केवल सामान्य ऑनलाइन टिकट बुकिंग ही नहीं, बल्कि RAC, वेटिंग टिकट और स्पेशल कोटे से संबंधित प्रक्रियाओं की भी जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने स्पेशल कोटे के आवंटन और उसके इस्तेमाल में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा टिकट कैंसिल होने के बाद रिफंड की प्रक्रिया और यात्रियों को मिलने वाले रिफंड में लगने वाले समय की भी समीक्षा की मांग की गई है।

स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक ऑडिट की मांग

याचिका में भारतीय रेलवे के यात्री रिजर्वेशन सिस्टम का स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य सिस्टम की कार्यप्रणाली, टिकट आवंटन, कोटा प्रबंधन, भुगतान प्रक्रिया और रिफंड व्यवस्था में संभावित कमियों की जांच करना है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग व्यवस्था में आम यात्रियों का भरोसा बनाए रखने के लिए तकनीकी सिस्टम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जरूरी है।

अब रेलवे और IRCTC के जवाब पर नजर

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब रेल मंत्रालय और IRCTC को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कोर्ट ने केंद्र और रेलवे की ओर से पेश वकील को संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेकर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होने की बात कही गई है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि रेलवे और IRCTC ऑनलाइन रिजर्वेशन सिस्टम से जुड़े इन आरोपों और यात्रियों की शिकायतों को लेकर क्या कदम उठाने का प्रस्ताव रखते हैं।

नोट: याचिका में लगाए गए आरोप और मांगी गई जांच अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इन आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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