Samosa Day Special: भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने कभी समोसे का स्वाद न लिया हो। चाय के साथ गरमा-गरम समोसा हो या बारिश के मौसम में दोस्तों के साथ इसकी चटपटी दावत—समोसा भारतीय खान-पान का बेहद लोकप्रिय हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कोई व्यक्ति समोसे के लिए अपनी अच्छी-खासी नौकरी और घर तक दांव पर लगा सकता है? Writer by Mohit Kumar 7-9-2026 4:25 pm बेंगलुरु के रहने वाले निधि और शिखर सिंह ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। दोनों ने अपनी साइंस से जुड़ी नौकरियां छोड़कर भारत के पसंदीदा स्नैक को ही अपना बिजनेस बनाने का फैसला किया। 2015 में लिया जिंदगी बदलने वाला फैसला निधि और शिखर का यह सफर साल 2015 में शुरू हुआ। उस समय दोनों के पास अच्छी नौकरियां थीं और एक स्थिर करियर भी। लेकिन उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का सपना था। दोनों ने नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया। इतना ही नहीं, अपने बिजनेस के लिए उन्होंने अपना घर भी बेच दिया और पूरा ध्यान समोसे के कारोबार पर लगा दिया। समोसे में देखा बड़ा बिजनेस आइडिया भारत में समोसा हर शहर और लगभग हर गली में आसानी से मिल जाता है। लेकिन निधि और शिखर ने इसी आम चीज में एक बड़ा बिजनेस अवसर देखा। उनका मानना था कि समोसा लोकप्रिय तो बहुत है, लेकिन इसे एक व्यवस्थित और बड़े ब्रांड के तौर पर पेश करने वाले विकल्प बेहद कम थे। इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक समोसे को आधुनिक बिजनेस मॉडल के साथ लोगों तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया। जोखिम बड़ा था, लेकिन हौसला उससे भी बड़ा नौकरी छोड़ना अपने आप में बड़ा फैसला था, लेकिन घर बेचकर बिजनेस में पैसा लगाना उससे भी बड़ा जोखिम था। शुरुआत आसान नहीं रही होगी, लेकिन दोनों ने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने समोसे को सिर्फ एक स्ट्रीट फूड की तरह नहीं देखा, बल्कि उसे एक ऐसे प्रोडक्ट के रूप में विकसित करने की कोशिश की, जिसे साफ-सुथरे, व्यवस्थित और ब्रांडेड तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके। आज उनकी कहानी बन गई मिसाल निधि और शिखर की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के साथ-साथ अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी एक साधारण-सा आइडिया भी बड़ी कामयाबी की वजह बन सकता है—बस उसके पीछे मेहनत, सही रणनीति और जोखिम उठाने का साहस होना चाहिए। Samosa Day पर इस कपल की कहानी यही संदेश देती है कि कामयाबी हमेशा बड़े और अनोखे आइडिया से ही नहीं मिलती। कभी-कभी सबसे आम चीज में छिपे अवसर को पहचानना ही सबसे बड़ा आइडिया बन जाता है। Post Views: 4 Post navigation गणेशोत्सव से पहले मुंबई में सख्ती, DJ और हाई-इंटेंसिटी लेजर लाइट्स पर पुलिस की नजर बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम हुई यश की ‘Toxic’, OTT राइट्स के लिए सिर्फ ₹30 करोड़ का ऑफर! रिलीज से पहले ₹150 करोड़ की थी डील